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Kanpur: पूरा शहर लुट रहा, शिक्षा विभाग को शिकायत का इंतजार, कॉपी-किताबों की खरीद में चल रहा कमीशन का खेल

Thu, 03 Apr 2025 12:51 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

शहर में कॉपी-किताबों की खरीद में कमीशन का खेल चल रहा है। जनपदीय शुल्क नियामक समिति मूक बनी हुई है। उलझे नियम के चलते अभिभावक किनारा काट रहे। 
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किताबें - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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शहर के शिक्षण संस्थानों में नया सत्र शुरू हो गया है। दाखिले के साथ कॉपी-किताबों की खरीद से पहले विद्यालयों ने कमीशन की डील तय कर ली है। इसके तहत विद्यालय या तो खुद कॉपी-किताबों का सेट अभिभावकों को उपलब्ध करा रहे हैं या फिर तय दुकान का पता दिया जा रहा है। वहीं, स्कूलों की इस मनमानियों को रोकने के लिए शासन से बनी जनपदीय शुल्क नियामक समिति शिकायतों का इंतजार कर रही है। पिछले पांच सालों में मात्र एक शिकायत आई है।
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शहर में सीबीएसई और सीआईएससीई के करीब 175 स्कूल हैं। वहीं, यूपी बोर्ड के स्कूल 600 से अधिक हैं। इन सभी में वार्षिक परीक्षा के बाद एक अप्रैल से नया सत्र शुरू हो गया है। कमाई के लिए विद्यालय अभिभावकों पर जल्द से जल्द कॉपी-किताबें खरीदने का दबाव बना रहे हैं। अभिभावक कहीं से पुरानी किताबें न ले लें, इसके लिए कुछ चैप्टर में हर बार बदलाव किया जा रहा है। कुछ स्कूल तो इस कदर वसूली पर उतर आएं है कि विद्यालय के नाम वाली कॉपी-किताबों को ही मान्य कर रहे हैं। इसके लिए प्रकाशकों से कवर तक प्रिंट करवाए गए हैं। इससे मजबूरी में अभिभावकों को तय जगह से ही इनकी खरीद करनी पड़ रही है।

कई किताबों से चैप्टर निकाल कर प्रकाशित करा रहे किताब
सत्र शुरू होने से पहले ही विद्यालय और दुकानदार के बीच कमीशन की डील होती है। स्कूलों में मान्य किताब केवल इन्हीं दुकानों पर ही उपलब्ध होती हैं। कुछ दुकानदारों ने बताया कि अब स्कूलों ने नया तरीका निकाला है। एक विषय की कई किताबों से कई चैप्टर निकाल कर इससे स्वयं की किताब प्रकाशित कराकर स्कूल से बेचा जाता है। लाख कोशिश करने के बावजूद अभिभावकों को यह किताबें कहीं बाहर नहीं मिलतीं।
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केस1: अभिमन्यु गुप्ता के बच्चे कैंट स्थित स्कूल में पढ़ते हैं। उन्होंने बताया कि 10वीं में प्रवेश लेने वाली बेटी की किताब का सेट 7000 और पांचवीं में बेटे का 6000 रुपये का सेट है। स्कूल अपने पास से किताबें खरीदने का दबाव बना रहा है। विद्यालय ने बुक लिस्ट तक नहीं जारी की। दूसरे अभिभावकों से किताबों के नाम व काॅपियों की संख्या लेकर अन्य दुकानों में पूछा तो रेट 25 फीसदी कम मिले।      
     
केस2: अभिभावक विवेक श्रीवास्तव ने बताया बच्चों के स्कूल से कॉपी-किताबों की लिस्ट मिली है। स्कूल ने तो लिखा है कि किताब कहीं से भी ले सकते हैं, लेकिन कई जगह ढूंढने के बाद भी नहीं मिली। मजबूरी में स्कूल की ओर से तय दुकान से ही कॉपी किताबें खरीदनी पड़ीं। इनके दाम भी काफी अधिक हैं।       

पहले स्कूल में दर्ज करानी होती है आपत्ति
जनपदीय शुल्क नियामक समिति के अध्यक्ष डीएम, सदस्य सचिव डीआईओएस होते हैं। समिति में पिछले पांच सालों में मात्र एक विद्यालय की शिकायत फीस वृद्धि को लेकर आई थीं। 2022 के बाद से समिति में कोई भी कार्य नहीं किया गया है। किसी भी अभिभावक ने कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई है। इसका कारण इसका उलझा नियम है। अगर कोई अभिभावक स्कूल में बढ़ी फीस या कॉपी किताब के दाम को लेकर परेशान है तो उसे पहले स्कूल में शिकायत करनी होगी। 15 दिन में कार्रवाई नहीं होने पर अभिभावक समिति में शिकायत करेगा। इसके बाद बैठक बुलाई जाएगी, जिसमें अभिभावकों को पूरे साक्ष्य देने होंगे। इन नियमों से भी अभिभावक शिकायत करने से किनारा करते हैं।

 

मोटा हिस्सा स्कूलों को जाता
काॅपी-किताबों का धंधा कम से कम 50 करोड़ रुपये का हो गया है। इसमें मोटा हिस्सा हर साल स्कूल को जाता है। स्कूलों ने काॅपी-किताबों के नाम पर खुली लूट मचा रखी है। स्कूल से मिलने वाली काॅपी और बाहर से लेने पर कम से कम 30 फीसदी का अंतर होता है। - आलोक दुबे, दुकानदार

बिना डर के अभिभावक कहें बात
कॉफी-किताबें खरीद में स्कूलों की मनमानी नहीं चलेगी। जल्द ही बैठक बुलाकर मामले का निस्तारण किया जाएगा। अभिभावक भी जागरूक बनें और बिना किसी डर के अपनी बात कहें। - अरुण कुमार, डीआईओएस

 
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जब अभिभावकों ने खरीद ली किताबें तब जागा विभाग
नया सत्र शुरू होने के दो दिन में ही करीब 90 फीसदी स्कूलों के अभिभावकों ने किताबें खरीद ली हैं। इस बीच डीआईओएस दफ्तर में कॉपी-किताबों की खरीद में जारी मनमानी की कई शिकायतें पहुंचीं। इस पर एडीआईओएस प्रशांत द्विवेदी ने 10 निजी स्कूलों को नोटिस जारी किया है। उन्होंने मदर टेरेसा स्कूल केशवनगर, वेंडी हाईस्कूल साकेतनगर, स्टेपिंग स्टोंस इंटर काॅलेज गोविंदनगर, मदर टेरेसा एजुकेशन सेंटर किदवईनगर, मर्सी मेमोरियल स्कूल किदवईनगर, चिंटल्स स्कूल रतनलालनगर, एसजे एजुकेशन सेंटर, एसजे विद्या निकेतन नौबस्ता, कामद शाइनिंग स्कूल बर्रा, राधाकृष्ण स्कूल रतनलालनगर को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। उन्होंने बताया कि तीन दिन में स्पष्टीकरण न देने वाले स्कूल संचालक के खिलाफ शासनादेश के उल्लंघन पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

समिति में डीएम अध्यक्ष, बोले- अभिभावक करें शिकायत
लगातार मिल रही शिकायतों के बाद डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह ने जनपदीय शुल्क नियामक समिति के पदाधिकारियों व सदस्यों की लिस्ट जारी की है। इसमें अध्यक्ष डीएम जितेंद्र प्रताप सिंह, सदस्य सचिव डीआईओएस व सदस्य के रूप में सीए सुरजीत चौधरी, अधीक्षण अभियंता अनिल कुमार, वित्त एवं लेखाधिकारी शिशिर जायसवाल, आरके मिशन स्कूल के प्रधानाध्यापक पंकज शुक्ला, अभिभावक प्रतिनिधि मनोज कुमार शामिल हैं। डीएम ने कहा कि अभिभावक किसी भी समस्या पर समिति में शिकायत कर सकते हैं।
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