व्यावसायिक भवनों का टैक्स पांच गुना तक बढ़ाया जाएगा। प्रस्ताव के बाद सर्वे का काम 30 जून तक पूरा होगा। टैक्स की वसूली इसी वित्तीय वर्ष (एक अप्रैल 2015) से होगी। इसके लिए शासन ने नई संपत्तिकर नियमावली भी जारी कर दी है। गौरतलब है कि पिछले दस वर्ष से व्यावसायिक भवनों पर नगर निगम ने टैक्स नहीं बढ़ाया है।
शहर में पांच लाख से ज्यादा भवन हैं। इनमें मकान, फैक्टरी, कारखाने, गोदाम, दुकानें आदि शामिल हैं, जबकि नगर निगम के रिकॉर्ड में 4.50 लाख प्रापर्टियां ही दर्ज हैं। इनमें से करीब 60 हजार प्रापर्टियां व्यावसायिक हैं। ये प्रापर्टियां 2005 में नगर निगम की तरफ से कराए गए जीआईएस सर्वे के तहत दर्ज की गई थीं। उस समय टैक्स को लेकर विवाद के बाद नगर निगम ने भवन मालिकों को अपने भवनों का सेल्फ असेसमेंट करने की भी सहूलियत दी थी। तब से उसी हिसाब से हाउस टैक्स लिया जा रहा है। इसी बीच 2013 में शासन ने हाउस टैक्स असेसमेंट के तरीकों को संशोधित करते हुए संपत्तिकर नियमावली-2013 बनाई। पिछले साल संशोधित संपत्तिकर नियमावली को लागू कर दिया गया, पर जिस समय इसे लागू किया गया, उस समय तक ज्यादातर क्षेत्रों में हाउस टैक्स के बिल वितरित हो चुके थे। इसलिए उस वित्तीय वर्ष (2014-15) में इसे लागू करना संभव नहीं था। अब इसे चालू वित्तीय वर्ष में लागू करने की तैयारी की जा रही है।
इसके तहत निगम सभी जोनों में तीन-तीन ऐसे वार्डों के व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे करा रहा है, जिनमें सर्वाधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान हैं। पहले चरण में जाजमऊ उत्तरी, जाजमऊ दक्षिणी, चकेरी, दादा नगर और पनकी समेत 18 वार्डों में सर्वे हो रहा है। वार्डों में कर निरीक्षकों की कमी के चलते उनके सहयोग के लिए प्रत्येक जोन में पांच-पांच आउटसोर्सिंग कर्मचारी भी लगाए गए हैं। जोन-2 के प्रभारी मुनीश निगम ने बताया कि पहले जीआईएस सर्वे और भवन मालिकों ने सेल्फ असेसमेंट किया था। कुछ मामलों को क्रास चेक किया गया था। बाकी को सही मानकर उनकी गणना के हिसाब से ही हाउस टैक्स लगाया था। अब व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का डोर टू डोर सर्वे हो रहा है। सर्वे के दौरान तमाम प्रतिष्ठानों का क्षेत्र (एरिया) ज्यादा निकल रहा है। ऐसी प्रापर्टियां भी मिल रही हैं जो आवासीय में दर्ज हैं।
व्यावसायिक प्रतिष्ठानों का सर्वे हो रहा है। जून तक पहला चरण पूरा हो जाएगा। यह नहीं कह सकता कि सभी व्यावसायिक भवनों का कर बढ़ेगा, पर ज्यादातर में डेढ़ से पांच गुना तक बढ़ोतरी हो सकती है क्योंकि संशोधित नियमावली में बढ़ोतरी की श्रेणियां (स्लैब) आवासीय से दो गुना, तीन गुना, चार गुना से लेकर पांच गुना रखी गई हैं।
- राकेश गुप्ता, अपर नगर आयुक्त (द्वितीय)
इनसेट
- शहर में मकानों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की संख्या- पांच लाख से अधिक
- हाउस टैक्स नेट में चिह्नित प्रापर्टियां- 4.50 लाख
- इनमें से व्यावसायिक प्रापर्टियां- 60 हजार (लगभग)
- हाउस टैक्स वसूली का लक्ष्य- 163 करोड़ रुपये
- पिछले वित्तीय वर्ष में हुई वसूली- 83 प्रतिशत