दोस्तों अभीन पिछले दिनों दीपावली वाले दिन अबू बकर बगदादी ई नश्वर शरीर का त्याग उई लोक मा पधारि गे.. हमरे हिसाब से बगदादी बहुतै शांतिप्रिय इन्सान रहैं.. एकांतवास पसंद करत रहैं.. हमेसा पहाड़न अउर गुफावन मा वास करत रहैं.. ऊ कभों कौनो पार्टी, डांस बार, डिस्को थेक, नाटक नौटंकी या कव्वाली पिरोग्राम मा नाहि गे.. बगदादी कभों मुंह से नाहि बोलत रहैं.. जब भी बोलत रहैं तो ‘गन’ से बोलत रहैं.. बहुतै ‘गनवान’ व्यक्ति रहैं..
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राजू श्रीवास्तव
उई हमेसा लोगों का जोड़े की कोसिस कीन.. सब लोगन का जोड़ जोड़ बहुत बड़ा गिरोह बनाईन.. बगदादी दीपावली का बहुत मानत रहैं.. उनका मानना रहा कि दीपावली साल मा एक्कै बार काहे मनाई जावै.. यही खातिर उई पूरे साल दीपावली मनावत रहैं अउर बम पटाखे फोड़ा करत रहैं.. उनका दीपावली प्रेम अईस गजब रहा कि दीपावली से पहिले उई आपन घर की साफ सफाई अउर पुताई पेंट करिन अउर दीपावली वाले दिन अईस बमपिलाट हलब्बी बम फोड़िन कि खुदौ फटि गे..
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Raju Srivastav
खैर ई तो रही बगदादी केर बात.. आजकाल जिंदगी मा सब कुछ अल्टी-पल्टी चलि रहा.. एकदम अमिताभ बच्चन वाले केबीसी केर लाइफ लाइन अल्टी-पल्टी जइसन.. अब बताव दिल्ली वाले केजरीवाल कहि रहें कि दुई हफ्ते खातिर दिल्ली पुलिस हमरे हवाले करि देव तो हम इनका सुधारि देबे.. अब केजरीवाल साहब का को बताये कि यही बात दिल्ली पुलिस उनके लिए कहि रही.. बताव आजकाल अईस गजब अल्टी-पल्टी चालि रहा.. अइसेहे एक ठो अल्टी-पल्टी सवाल हमरेहौ दिमाग मा घूमि रहा..
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Raju Srivastav
कि ई जो राजनीति आय.. ई सेवा आय या नौकरी..? अगर ई सेवा आय तो फिर नेता लोगे भारी भारी तनख्वाह काहे लेत हैं.. सरकारी गाड़ी, बंगला अउर सब सुख सुविधा काहे भोगत हैं..? अउर अगर ई नौकरी आय तो फिर एकी शैक्षणिक योग्यता का है अउर एके इम्तिहान कहां होत हैं.. एकी भर्ती केर विज्ञापन कौने अखबार मा निकलत है अउर एके पासिंग मार्क कित्ते होत हैं.. अभीन दीपावली मा अइसेहे अल्टी-पल्टी खुद हमरे साथै हुई गा.. हमार साली सिविल लाइन्स मा रहत हैं..
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राजू श्रीवास्तव
उई दीपावली पे आपन घरे खाने पे बुलाईन.. तो हम पंचे हमार साली के हिंया खाने पे गए.. जब खाना लगे लाग तो अइसेहे हमरे मुंह से निकसि गा कि ‘खाना खाय से पहिले जूता उतारि का !!’.. हमार साली खिसियाय के बोली जीजाजी.. जूते ना उतरिहौ तो खईहौ का .. बताव अईस भिगो के जूता मारिस कि का बताई.. सब अल्टी-पल्टी चालि रहा.. अभीन परसों टाटमिल चौराहे पे एक ट्रक खड़ा रहा.. ओके पीछे कुछ अईस अल्टी-पल्टी लिखा रहा कि हमसे रहा नाहि गवा.. हम ओके डराइबर का साइड मा लिहेन अउर पूछेन कि सरदार भगत सिंह का जानत हौ?.. उई कहिस नाहि..
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राजू श्रीवास्तव
हम कहा सुभाषचन्द्र बोस का जानत हौ?.. उई कहिस नाहि.. हम कहा गणेश शंकर विद्यार्थी का जानत हौ?.. उई कहिस नाहि.. हम कहा चंद्रशेखर आजाद का तो जनते हुईहौ?.. उई कहिस नाहि.. तो हम उससे गुस्साय के पूछेन कि जब इन सबका नाहि जानत हौ तो आपन टरक के पीछे काहे लिखाय हौ प्रणाम शहीदों को..? इस पे ऊ टरक डराइबर जवाब दिहिस कि ई तो उन लोगन के लिए लिखावा है जो ई ट्रक के नीचे आए रहैं.. वइसे दोस्तों नवम्बर महीना लागि गवा..
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राजू श्रीवास्तव
शादी बियाह केर मौसम चालू हुई गवा.. अब सादी बियाह का खाना हपक के हौंके केर सीजन आय गवा.. अउर आपन कनपुरिये तो अईस उस्ताद आयं कि चाहे बुलव्वा होय चाहे ना होय.. अगर एरिये मा कौनो सादी फंक्सन है तो ई परम लोगे चरम सीमा तलक ठूंस लेत हैं.. अइसेहे गुजैनी मा हम अउर मनोहर एक शादी मा गे रहन.. हुंवा जब हम दुईनो खाना खात रहन तो देखे कि एक आदमी पलेट मा 8-10 गुलाबजामुन लिए.. एक एक करि के सब रसगुल्ला का थोड़ा-थोड़ा खाय-खाय के पलेट मा रखि रहा रहय.. हम उस से कहा कि भईया का एक एक रसगुल्ला का चेक करि रहे हौ..? कि मीठा आय कि नाही..
तो उई जवाब दिहिस नाही.. नाही.. अईस बात नाहि आय.. हर रसगुल्ला काट के पलेट मा रखि दिये हन.. अब ई साले प्लेट मा इधिर उधिर लुढ़क के रायता-आचार-चटनी मा नाहि घुसिहैं.. ई सुनि के मनोहर के हाथे से तो पलेट छूटि गे.. बताव अईस लपचंडूस अल्टी-पल्टी जुगाड़ !!.. वइसे आईडिया जोरदार आय.. अब हम कौनो सादी बियाह फंक्सन मा जाईत है तो हमहूं अइसेहे करित है.. बढ़िया आईडिया आय.. आपहौ करि के देखौ..!! लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ.. काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है।