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आपन अम्मा का याद करै का भी कौनौ दिन होय का...अंग्रेजन के चोंचले हैं

Mon, 21 May 2018 12:50 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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राजू श्रीवास्तव
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पिछले दिनों 13 मई को मदर्स डे रहा। सब मां केर गुणगान करत रहे कि मां केर पैरन के नीचे जन्नत होत है। कोऊ कहत रहा कि मां केर आंचल मा हमरी दुनिया समाई भई है... कोऊ कहे कि मां दूध का कर्ज कभौं ना चुका पाइब। उस दिन पूरे दुनिया मा लोग आपन आपन मां का याद करत रहें...। सारे टीवी चैनल अउर सोशल मीडिया मा तो एकदम बाढ़ आय गई रही... जेका देखो मेरी मां मेरी मां करत रहा... अउर जस्ट ओके दूसर दिन देखा ट्रैफिक जाम मा दुई रिक्शा वाले तेरी मां... तेरी मां की करत रहें। वइसे हमका ई मदर्स डे, फादर्स डे मा विस्वास नहीं ना... ई का बात भई कि आपन अम्मा बप्पा के याद करे के लिए साल मा कौनो एक दिन होय...। ई सब अंग्रेज लोगन केर चोंचले हैं... ऊ का है कि अंग्रेज लोग कम उमर मा आपन माय बाप से अलग हुई जात हैं...। बाहर पढ़त हैं, खुदै शादी कर लेत हैं...।

 

तबहीं ऊ लोग अइसा एक दिन बनाईन होइहैं जेमा साल मा एक बार आपन माय बाप से मिल सकैं। हम लोगन का ई सब की जरूरत नहीं ना... हमरा संयुक्त परिवार है... मां पिताजी दादा दादी सबै लोग एक साथ एकै घर मा रहित हैं...। हमरे घर मा तो बारहौं महीने हर दिन मदर्स डे रहत है...। हमका याद है जब हम कालिज मा पढ़ित रहे तो हमरे मोहल्ले मा एक लड़की रही सुनीता...। हम दुईनो का कुछ चलत रहा आपस मा जेके मारे ऊ कभो नोट्स तो कभो गेस पेपर लै के बहाने हमरे घर आत रही। अच्छा हमरी अम्मा के खानदान मा दूर दूर तक न कोऊ तांत्रिक रहा ना ओझा फिर भी का जाने कइसे अम्मा का पता लग गवा रहै। हमसे कहत रहीं कि ई सुनीता चुड़ैल है इस से दूर रहा करौ। ऐसेहे एक दिन हम अउर सुनीता भंडरिया मा पढ़ाई करत रहें तो अम्मा धमक पड़ी अउर सुनीता का चिमटा लैके दौडाय लिहिन...। ओका झोंटे से पकड़ के ओकेर माय के पास लैके गईं अउर बहुतै खरी खोटी सुनाय डालिन... कि आपन लड़की का संभालो...। ओके बाद हम अउर सुनीता कबहूं नहीं मिले। बाद मा ओकी सादी हुई गयी.. ओका आदमी अइसा रहा कि का बताई... काम ना धाम मोहल्ले मा बदनाम...। दारु पिये के बाद सुनीता का बहुत कूटत है। अम्मा !! अगर तुम हमरी सादी सुनीता से कराय देती तो तुमरा का जाता !! अच्छा अम्मा एक बात का अभीनो तक पता नहीं चला कि हमरे अउर सुनीता के बीच मा लबड़धक्का चलत रहा है तुमसे एकी मुखबरी को किहिस रहै...। हमका दुई तीन लोगन पे सक है बट आय एम नॉट स्योर...। अइसे मा एक शेर याद आय रहा है कि

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किसी के हिस्से में मकां आया... किसी के हिस्से में दूकां आई...
मैं घर में सबसे छोटा था... मेरे हिस्से में....... अम्मा तुम काहे आईं?


अम्मा तुम हमका कितना दौडाय हौ... जब छोटे रहन तो जैसेहे स्कूल से आयेन तुम दौडाय देत रहेव... जाओ चक्की पे गेंहू पिस गवा होई लैके आओ... जाओ जल्दी से कंट्रोल पे मोटे दाने केर शक्कर आई लपक के लै आओ... मामा आत हुईंहैं उनके लिए समोसा लै आव... जाओ बाबा खातिर दही ले आव...। लेकिन आज हमका पता चला कि तुम्हरी सख्ती हमरे कितने फायदे की रही...। आज हम जिम मा पइसे देके ट्रेडमिल पे दौड़े जात हैं... आज सब कहत हैं कि हर इंसान का फिट रहे खातिर कम से कम एक घंटा दौड़े का चाही.. अम्मा ई दूरंदेसी तुम्हरे पास पहिले से रही...। अम्मा आज तुम हमका बहुत याद आत हौ...। ई तुम्हरा आसिर्वादै केर नतीजा है कि आज दुनिया मा हमरा इत्ता नाम है सोहरत है...। आज लोग हमसे मिलै का चाहत हैं...। हमरे साथ फोटू खिंचावे का चाहत हैं...। आज अगर तुम हुईतीं तो ई सब देख के केतना खुश हुईती...।  तुमका भगवन केर घर जाय की एतनी जल्दी काहे रही !! बहुत जल्दी चली गईं अपने रजुवा का छोड़ के अम्मा !!- राजू श्रीवास्तव (कॉमेडियन)

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