हाइपोथर्मिया के लक्षणों पर भी ध्यान दिलाया
ऊनी कपड़ों की कमी की स्थिति में दो-तीन कपड़े एक के ऊपर एक पहनकर भी ठंड से बचाव किया जा सकता है। अत्यधिक ठंड और कोहरे के दौरान छोटे बच्चों और बुजुर्गों को यथासंभव घर के भीतर ही रखें। शरीर की ऊष्मा बनाए रखने के लिए पोषक आहार और गर्म पेय पदार्थों का सेवन करें तथा धूप निकलने पर उसका लाभ लें। जिलाधिकारी ने हाइपोथर्मिया के लक्षणों पर भी ध्यान दिलाया। उन्होंने बताया कि शरीर का असामान्य तापमान, भ्रम या स्मृति हानि, बेहोशी, अत्यधिक ठिठुरन, सुस्ती, थकान या तुतलाहट जैसे लक्षण दिखने पर तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।
वेंटिलेशन के लिए पर्याप्त स्थान खुला छोड़ें
इसी तरह शीतदंश की स्थिति में हाथ-पैर की उंगलियों, कान या नाक का सुन्न पड़ना अथवा सफेद या पीले रंग के दाग उभरने पर भी तत्काल चिकित्सकीय परामर्श लें। एडवाइजरी में यह भी कहा गया है कि आसपास अकेले रहने वाले पड़ोसियों, विशेषकर बुजुर्गों की जानकारी रखें और किसी भी आपात स्थिति में नजदीकी पुलिस स्टेशन से संपर्क करें। ठंड और शीतलहर के दौरान पालतू पशुओं और पक्षियों के बाड़ों को ऊष्मा रोधी बनाएं, खिड़की-दरवाजे ढककर रखें, लेकिन वेंटिलेशन के लिए पर्याप्त स्थान खुला छोड़ें।
बीमारियों के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें
सिगड़ी, अलाव या अंगीठी सोते समय बुझाकर ही सोएं और इन्हें बंद स्थानों पर जलाने से बचें, ताकि आगजनी की घटनाएं न हों। यदि कोई निराश्रित, असहाय, विकलांग, बीमार या मानसिक रूप से अस्वस्थ व्यक्ति ठंड से प्रभावित दिखाई दे तो क्षेत्रीय लेखपाल के माध्यम से उन्हें निःशुल्क कंबल दिलाने में सहयोग करें। एडवाइजरी में शीतलहर से पहले और शीतलहर के दौरान अपनाए जाने वाले उपाय भी स्पष्ट किए गए हैं। नागरिकों से अपील की गई है कि मौसम पूर्वानुमान पर नजर रखें, पर्याप्त सर्दियों के कपड़े पहनें, आपातकालीन आवश्यक सामग्री पहले से तैयार रखें और ठंड से जुड़ी बीमारियों के लक्षण दिखने पर डॉक्टर से संपर्क करें।