वहां उन्होंने शपथपत्र की सच्चाई परखी। शिकायतकर्ता वकील अनूप शाक्य व सुनील दिवाकर ने उन्हें लिखकर दिया कि उन्होंने इस तरह का कोई शपथ पत्र दिया ही नहीं है। जो शपथपत्र दिया गया है उसमें उनके हस्ताक्षर भी नहीं हैं।
शपथपत्र बनाने वाले कथित नोटरी वकील ने भी अपने हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया है। ऐसे में भ्रष्टाचार की जांच का दंश झेल रहे जनपद अलीगढ़ निवासी तत्कालीन सीओ सिटी मन्नी लाल गौंड को पेंशन व अन्य देयकों के लिए लंबा इंतजार करना होगा।
शपथ पत्र के मामले में सतर्कता अधिष्ठान की इंस्पेक्टर आराधना सिंह जांच करने आई हैं इसकी जानकारी नहीं है। शपथ पत्र तो शिकायतकर्ता के माध्यम से ही मिला था। फिर फर्जी कैसे हो गया।- मन्नीलाल गौंड, सेवानिवृत्त सीओ सिटी
‘फर्जी शपथ पत्र देने के मामले में विवेचनाधिकारी आईपीसी 182 की संस्तुति कर रिपोर्ट कोर्ट में भेजेगा। कोर्ट उसे संज्ञान में लेकर कार्रवाई कर सकता है। चूंकि भ्रष्टाचार के मामले सतर्कता अधिष्ठान में जांच चल रही है इसलिए फर्जी शपथ पत्र देने के मामले में जांच अधिकारी तत्कालीन सीओ सिटी के खिलाफ कार्रवाई के लिख सकती हैं। यह उनके विवेक पर निर्भर है।’ -दीपक द्विवेदी, अधिवक्ता