बीपी बढ़ने पर उन्हें तत्काल जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत में सुधार होने पर डॉ. एसके वर्मा ने बताया कि वह तीन दिन की छुट्टी पर गए थे। इस दौरान चरखारी की डॉक्टर गीतांजलि को महिला अस्पताल में संबद्ध कर लिया गया। छुट्टी से वापस आने पर जब सर्जन डॉक्टर ने महिला डॉक्टर को वापस चरखारी भेजने की बात कही तो सीएमएस भड़क गए। आरोप लगाया कि सीएमएस ने उनके साथ गाली-गलौज करते हुए गर्दन मरोड़ देने की धमकी दी।
आरोप है कि सीएमएस अन्य स्टाफ से भी पैसे की मांग करते हैं
इस दौरान 50 हजार रुपये की मांग की गई। आरोप लगाया कि सीएमएस अन्य स्टाफ से भी पैसे की मांग करते हैं। न देने पर कर्मचारियों को परेशान किया जा रहा है। सीएमएस की धमकी से उनका बीपी बढ़ गया और वह अचेत होकर गिर गए। तब उन्हें अस्पताल लाया गया। डॉक्टर व सीएमएस के विवाद के बाद अस्पताल में भर्ती प्रसूताएं और उनके परिजन परेशान रहे। (सीएमएस उरई निवासी हैं, वहीं डॉ. एसके वर्मा झांसी के रहने वाले हैं। काफी समय से महोबा में ही रह रहे हैं।)
डॉ. एसके वर्मा का बीपी बढ़ गया, अस्पताल में भर्ती कराया
सूचना पर पहुंचे सीएमओ डॉ. आशाराम ने मामला शांत कराते हुए ऑपरेशन व गर्भवती महिलाओं का इलाज शुरू कराया। सीएमओ ने कहा कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। जो भी दोषी होगा, उसके खिलाफ लिखापढ़ी करते हुए कार्रवाई कराई जाएगी। उधर, सीएमएस डॉ. एसपी सिंह का कहना है कि आरोप बेबुनियाद है। एक मरीज का ऑपरेशन होना था। इसको लेकर मामूली कहासुनी हुई। इसके बाद डॉ. एसके वर्मा का बीपी बढ़ गया। बीपी की वजह से ही उन्हें अस्पताल में भर्ती किया गया।
महिला डॉक्टर को संबद्ध किए जाने पर हुआ विवाद
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र चरखारी में तैनात डॉ. गीतांजलि को महिला अस्पताल में संबद्ध किया गया था। बताया जा रहा है कि सीएमओ ने महिला जिला अस्पताल के डॉ. एसके वर्मा के तीन दिन के अवकाश पर जाने पर गर्भवती महिलाओं के ऑपरेशन बाधित न हो इसके लिए डॉ. गीतांजलि को महिला अस्पताल से संबद्ध कर दिया था। अवकाश के बाद लौटने पर डॉ. एसके वर्मा ने इसका विरोध किया। इसके बाद अधिकारियों से कहासुनी हुई और विवाद बढ़ गया।
हमेशा सुर्खियों में रहता है महिला अस्पताल
जिला महिला अस्पताल कभी सुविधा शुल्क मांगने तो कभी कर्मचारियों के आपसी विवाद को लेकर सुर्खियों में रहता है। तीन दिन पहले इलाज में लापरवाही से नवजात की मौत होने के मामले में परिजनों ने सड़क पर जाम लगा दिया था। स्टाफ नर्स पर भर्ती न करने का आरोप भी लगा था। इसके बाद जांच की बात कहकर मामला शांत करा दिया गया था। निजी केंद्रों से अल्ट्रासाउंड व दवाओं में कमीशन को लेकर भी डॉक्टरों और कर्मचारियों के बीच तनातनी मची रहती है।
घटना के बाद दो गुटों में बंटे अस्पतालकर्मी
सीएमएस और डॉक्टर के विवाद से स्वास्थ्य महकमा दो गुटों में बंट गया है। महिला अस्पताल के फॉर्मासिस्ट, कर्मचारी, स्टाफ नर्स, एएनएम व अन्य कर्मचारी दो भागों में बंटे दिख रहे हैं। कुछ कर्मचारी सीएमएस के पक्ष में तो कुछ डॉक्टर के समर्थन में कूद गए हैं। निजी अल्ट्रासाउंड केंद्र और मेडिकल स्टोर संचालक भी अपने खास का समर्थन करते दिख रहे हैं।
सीएमएस की कार्यप्रणाली के विरोध में उतरीं आशा कार्यकर्ता
महोबा जिला महिला अस्पताल में सीएमएस व डॉक्टर के बीच विवाद होने के बाद आशा बहुएं भी विरोध में उतर आईं हैं। आशा हेल्थ वर्कर्स एसोसिएशन की जिलाध्यक्ष आशा शुक्ला के नेतृत्व में मीना, मुन्नी, संगीता, राजकली, ममता समेत 20 से अधिक आशा बहुओं ने डीएम मृदुल चौधरी को ज्ञापन सौंपकर बताया कि अस्पताल में तैनात सीएमएस हर काम में रुपये की मांग करते हैं। सामान्य प्रसव से लेकर ऑपरेशन तक में रुपयों की मांग की जाती है। नसबंदी ऑपरेशन के लिए वह ग्रामीण क्षेत्रों से महिलाओं को लातीं हैं। इनकी जांच से लेकर ऑपरेशन तक में 500 रुपये का खर्च बताया जाता है। उन्होंने मामले की जांच कराकर अस्पताल में चल रहे भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाए जाने की मांग की है।