मीट कारोबार को लेकर अब तक भले ही नियम-कानून दरकिनार रहे हों, लेकिन नई सरकार के फरमान के बाद अब खलबली मची है। प्रशासन की सख्ती के बाद मीट और चिकन की दुकानें बंद हो गई है। प्रशासन और संबंधित विभागीय अधिकारी अब नियम कायदे खंगाल कर सिर्फ लाईसेंस वालों को ही शहर के बाहर चलाने की अनुमति देने की बात कह रहे है।
जिले में स्लाटर हाउस का कोई भी लाइसेंस नहीं है। यह बात अलग है कि अभी तक गुपचुप तरीके से पशु कटते रहे हैं। इसके अलावा मीट बिक्री का कारोबार भी मनमाने ढंग से चलता रहा है। स्थानीय नगर निकाय और पुलिस के अनापत्ति प्रमाण पत्र के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग इसके लिए पंजीकरण और लाइसेंस जारी करता है। अभी तक चंद पंजीकरण ही हुए थे जिनमें भी अधिकांश ने नवीनीकरण नहीं कराया।
वर्तमान में इक्का-दुक्का पंजीकरण ही वैध हैं,लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग ने कभी मौके पर पहुंचकर पंजीकरण की स्थिति और कारोबार के मानकों की पड़ताल नहीं की। इसके अलावा बिना लाइसेंस के दर्जनों दुकानें संचालित होती रही हैं। अब इसको लेकर खड़बड़ मची है। पूरे जिले में मीट की दुकानों को बंद कराया जा रहा है।
ये हैं खास नियम
- सफाई व्यवस्था के लिए स्थानीय नगर निकाय का अनापत्ति प्रमाण पत्र
- आवासीय परिसर में नहीं होगा कारोबार
- गीजर की व्यवस्था, मांस काटे जाने वाले औजार 82 डिग्री सेल्सियस पर धोए जाएं।
- 4 से 8 डिग्री सेल्सियस तापमान में रखा जाए मांस
- पशु के कटने से पहले और बाद में परीक्षण कर पशु चिकित्साधिकारी देते हैं मांस बिक्री की अनुमति
- तीन मीटर से ऊंचा कारोबार स्थल
- दीवारों पर पांच फीट तक टाइल्स
- फ्लाई कैचर की व्यवस्था
- आसपास न बंधे हों जिंदा जानवर
- धूल-मिट्टी न आती हो
- अपारदर्शी कांच, जिससे बाहर लोगों को मांस-खून आदि न दिखे
- अवशेषों के उचित निपटान की व्यवस्था