कार्यक्रम में पांच बाढ़ पीड़ितों को चेक दिए जाने थे। लाभार्थियों को मंच पर किस ओर से लाया जाए, इसे लेकर कर्मचारियों को जानकारी नहीं थी। इसी दौरान मंच पर अफरातफरी का माहौल बन गया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए व्यवस्था को लेकर सवाल उठाए।
प्रभारी मंत्री ने संभाली स्थिति
मंच पर माहौल बिगड़ता देख प्रभारी मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी को बीच में आना पड़ा। उन्होंने हाथ के इशारे से मुख्यमंत्री को शांत कराया। इसके बाद अधिकारियों ने बाढ़ पीड़ितों को मंच के किनारे से लाकर चेक दिलाए। व्यवस्था संभलने के बाद चेक वितरण की प्रक्रिया पूरी की गई।
दो माह पहले दिया था 951 करोड़ का तोहफा
दो माह पूर्व आठ जुलाई को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जिले को 951 करोड़ रुपये की 124 विकास परियोजनाओं की सौगात दी थी। तब मंच पर विकास योजनाओं और भविष्य की तस्वीर थी। रविवार को वही मुख्यमंत्री बाढ़ की मार झेल चुके परिवारों के बीच पहुंचे। मंदाकिनी की बाढ़ में घर-गृहस्थी उजड़ने के बाद परेशान लोगों के बीच उन्होंने राहत सामग्री बांटी और उनकी समस्याएं जानीं।
किसी बाढ़ पीड़ित को न हो कोई कमी
राहत किट बांटते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए कि किसी भी बाढ़ पीड़ित को किसी तरह की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के साथ हर जरूरतमंद तक समय से मदद पहुंचाने को कहा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि आपदा की घड़ी में किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। प्रशासन पूरी संवेदनशीलता के साथ राहत कार्य में जुटे और प्रभावित परिवारों की जरूरतों का ध्यान रखा जाए।
आठ जुलाई को विकास, अब आपदा में सहारा
आठ जुलाई को जब मुख्यमंत्री चित्रकूट पहुंचे थे, तब फोकस सड़क, बिजली और दूसरी विकास परियोजनाओं पर था। दो माह बाद मंदाकिनी की बाढ़ ने जिले के कई इलाकों में हालात बदल दिए तो सरकार की प्राथमिकता राहत और बचाव पर आ गई। मुख्यमंत्री का खुद बाढ़ पीड़ितों के बीच पहुंचना प्रशासन के लिए भी स्पष्ट संदेश रहा कि आपदा के समय प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना प्राथमिकता है। राहत किट लेते परिवारों के चेहरों पर बाढ़ से हुई परेशानी साफ दिखाई दी, वहीं मुख्यमंत्री उन्हें मदद का भरोसा देते नजर आए। दो माह के अंतराल में एक ही जिले में विकास और आपदा के दो अलग-अलग दृश्य देखने को मिले।