आदित्यनाथ योगी ने मुख्यमंत्री पद का कार्य भार ग्रहण करते ही यूपी की सभी सड़कों को गड्ढामुक्त करने का अधिकारियों को फरमान सुना दिया था। इस आदेश का असर कहीं बहुत असरदार साबित हुआ तो कहीं एकदम बेअसर नजर आया।
अभी तक सामने आई खबरों में सड़कों की केवल अच्छी तस्वीर ही सामने पेश की गई लेकिन अमर उजाला डॉटकॉम आपको एक ऐसे इलाके से रूबरू कराने जा रहा है जिस पर सीएम योगी का मुख्य फोकस है इसके बावजूद वहां के बुरे हालातों से वे बेखबर हैं। यह कह पाना मुश्किल है कि अब तक इन इलाकों की तस्वीर सीएम योगी से कैसे छुपी रह गई। तो आइए जानते हैं धरातल पर हकीकत...
हम बात कर रहे हैं यूपी के महोबा जिले की। यहां की सड़कों का सूरत-ए-हाल वैसा ही जैसा पिछली सरकारों के दौरान रहा। सीएम योगी के आदेश के बाद भी पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने 194 किमी लंबी 137 सड़कों को गड्ढामुक्त करने के लिए चयन कर लिया है, लेकिन धरातल की हकीकत बताती है कि यहां काम केवल कागजी तौर पर किया जा रहा है।
आजतक इन सड़कों के निर्माण कार्य के लिए न तो टेंडर प्रक्रिया हुई न ही किसी अन्य तरीके से सड़कों का कार्य कराने की लोक निर्माण विभाग ने कोई योजना बनाई। सीएम योगी की डेडलाइन खत्म होने को बस कुछ ही दिन बाकी रह गए हैं। इसके बाद भी अभी तक सड़कों का निर्माण नहीं कराया जा रहा है।
अब तो लोगों की आखों में उम्मीद दिये भी बुझते दिख रहे हैं। दरअसल, स्थिति ऐसी बन गई है कि 194 किमी लंबी सड़कों का कार्य निर्धारित समय में पूरा हो पाना किसी भी हाल में मुमकिन नहीं नजर आ रहा।
हालांकि पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता मानिकचंद्र ने बड़ा दावा कर डाला है। इनका कहना है कि 194 किमी लंबी सड़कों का चयन तो कर लिया गया है। जल्द ही लेयर डालकर ऊबड़ खाबड़ सड़कों को समय सीमा के अंदर तैयार किया जाएगा।
एक साल में भी नहीं बन सकी 13 सड़कें
महोबा मॉडल सिटी घोषित होने के बाद शासन ने शहर की 13 ऊबड़ खाबड़ सड़कों के निर्माण के लिए एक साल पहले धनराशि अवमुक्त कर दी थी। कार्यदायी संस्था लोक निर्माण विभाग ने एक साल में महज चार सड़कों को तैयार कर सका है। एक साल पहले टेंडर हो जाने के बाद भी ठेकेदार सड़के नहीं बन सकी। अब बालू की कमी हो जाने से ठेकेदार निर्माण कार्य में टाल मटोल नीति अपना रहा है। यही वजह है कि करीब नौ सड़कों का निर्माण कार्य अधर में लटक गया है।