पान और गुटखा की पीकों और बीड़ी-सिगरेट के धुएं से दफ्तरों को मुक्त रखने का सीएम योगी आदित्यनाथ का फरमान पहले दिन इटावा में बेअसर रहा। यहां जिला मुख्यालय में हालात वैसे ही नजर आए जैसे हमेशा कायम रहे हैं।
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दफ्तरों में न तो पान मसाला खाकर आने वाले लोगों को सबक सिखाने की पहल शुरू हुई और न ही पान मसाला की पीकों से बदरंग दीवारों को साफ-सुथरा करने की जहमत उठाई गई। सबसे ज्यादा दयनीय हाल विकास भवन और कलेक्ट्रेट परिसर का है। यहां की दीवारें पान मसाला की पीक से रंगी हैं। विकास भवन में करीब दो दर्जन सरकारी विभागों के दफ्तर हैं। हर रोज सैकड़ों लोगों का आना-जाना रहता है।
दोमंजिला इस इमारत में शायद ही ऐसा कोई कोना मिले, जहां पान मसाला पीक न पड़ी हो। पंचास्थानि जिला निर्वाचन कार्यालय के सामने स्थित एक दीवार तो पूरी तरह से पीकों से बदरंग हो गई है। इस दीवार पर न सिर्फ ग्राउंड फ्लोर से पान की पीक मारी जाती है, बल्कि तमाम लोग फर्स्ट फ्लोर से ही इसे बदरंग बनाते रहे हैं। कुछ ऐसा ही हाल तीनों सीढ़ियों के किनारों का है। आमतौर पर लोग ऊपर जाते वक्त किनारों को पान की पीकों से रंग देते हैं। आडिटोरियम हाल को जाने वाले दरवाजे के पास भी ऐसा ही नजारा आसानी से देखा जा सकता है। गुरुवार को भी लोग दफ्तरों में पान मसाला चबाते रहे, पर इन्हें किसी भी अधिकारी और कर्मचारी ने नहीं रोका-टोका।
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कलेक्ट्रेट परिसर की बात करें तो यहां जिला निर्वाचन कार्यालय के पीछे, पानी पीने के पानी स्टैंड के पास, आपूर्ति विभाग और डूडा दफ्तर के बाहर आदि कई स्थानों पर पान मसाला की पीकें पड़ी हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में भी पान मसाला खाने वाले कर्मचारी हो या आम आदमी, किसी पर भी मुख्यमंत्री के फरमान का असर नहीं दिखा। कलेक्ट्रेट और विकास भवन से अलग स्थानों पर मौजूद सरकारी दफ्तरों में भी साफ सफाई को लेकर कोई प्रभावी कवायद होती नजर नहीं आई। छात्र अध्यापकों को प्रशिक्षण देने वाले डायट परिसर की दीवारें भी पान मसाला की पीकों से रंगी दिखीं। यहां गेट के पास स्थित एक कमरे के दरवाजे के बिल्कुल पास पान मसाला की पीकें नजर आईं। यहां भी ठंडे पानी के स्टैंड के नीचे तमाम गंदगी रही। पहले दिन किसी भी दफ्तर में सीएम के फरमान का असर नहीं दिखा।