राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से नारी शक्ति पुरस्कार प्राप्त करतीं कानपुर की कलावती
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महिला दिवस के अवसर पर स्वच्छता वीरांगना के नाम से मशहूर कलावती ने पूरे देश में कानपुर का नाम रोशन किया है। पिछले 32 वर्षों से खुले में शौच के लिए मुहिम चला रही 70 वर्षीया कलावती पेशे से महिला राजमिस्त्री रही हैं। उन्हें आत्म निर्भर बनने की प्रेरणा उनके पति जयराज सिंह से मिली।
पति भी राजमिस्त्री थे। उनके निधन के बाद कलावती ने अपना पूरा जीवन खुले में शौचालय अभियान को दे दिया। रविवार को जब राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने उन्हें दिल्ली में नारी शक्ति पुरस्कार से सम्मानित किया तो फिर से उनके संघर्ष की कहानी लोगों के सामने आ गई। आज से करीब 42 साल पहले कलावती सीतापुर से अपने पति के साथ कानपुर आई थीं।
जेके मंदिर के पीछे राजापुरवा में रहते हुए वह भी अपने पति के साथ भवन निर्माण में मजदूरी करने लगी। इसी दौरान उन्होंने पति का हाथ बंटाने के लिए राजमिस्त्री के रूप में काम करना शुरू किया। कुछ समय बाद वह श्रमिकों के कल्याण के लिए गठित संस्था श्रमिक भारती से जुड़ गईं। इसके बाद कलावती ने पीछे नहीं देखा। वह अपने साथ और भी महिलाओं को जोड़कर पूरा कुनबा तैयार कर लिया।