केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को स्मार्ट सिटी की अपनी पहली सूची जारी कर दी। 20 शहरों वाली इस लिस्ट में कानपुर जगह नहीं बना सका। हालांकि स्मार्ट सिटी के लिए कराई गई वोटिंग में कानपुर अव्वल था।
अब असल चुनौती करीब तीन महीने बाद स्मार्ट शहरों की दूसरी लिस्ट में जगह बनाने की होगी। इसके लिए नए सिरे से कवायद करनी होगी। साथ ही यह भी जानना होगा कि कानपुर कैसे पिछड़ गया, इन कमियों को भी दूर करना होगा।
मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर, व्यवस्थित ट्रैफिक और जागरूकता न होने के कारण इस बार कानपुर स्मार्ट सिटी की सूची में आने से वंचित रह गया। माना जा रहा है कि शहरियों में सिविक सेंस की भारी कमी के कारण हम स्मार्ट होने से चूक गए। अब अगले चयन का इंतजार करना होगा, लेकिन इस दौरान शहर की व्यवस्था सुधारना भी एक बड़ी चुनौती है। विशेषज्ञों का कहना है कि विकास कार्यों में जबरदस्त तेजी लानी होगी, ताकि शहर स्मार्ट हो सके।
केंद्र सरकार ने गुरुवार को स्मार्ट सिटी की दौड़ में शामिल 98 शहरों में से टॉप-20 स्मार्ट सिटी की घोषणा की, पर इस सूची में कानपुर का नाम न होने से कनपुरियों को घोर निराशा हुई। हालांकि इस दौड़ में सिटीजन इंगेजमेंट के मामले में नंबर-वन बनने से कंपू का दावा मजबूत माना जा रहा था, पर इन उम्मीदों पर पानी फिर गया।
हम यहां चूके
इंफ्रास्ट्रक्चर
जर्जर सड़कें, अधूरे पुल, फ्लाईओवर का निर्माण वर्षों से अधूरा है। एयर कनेक्टिविटी भी बंद हो गई है।
जेएनएनयूआरएम परियोजना अधूरी
शहर में जेएनएनयूआरएम की जलापूर्ति, सीवरेज परियोजनाएं 2008 में शुरू हुईं, जो पांच साल में पूरी होनी थीं, पर अभी भी कार्य अधूरे हैं। जबकि सालिड वेस्ट निस्तारण प्लांट बंद हो गया।
साफ-सफाई
50 लाख की आबादी वाले इस शहर में जगह - जगह गंदगी, कूड़े के ढेर लगे रहते हैं। सड़क पर कूड़ा फेंका जाता है। सीवर लाइनें चोक हैं।
जागरूकता की कमी
कनपुरियों में सिविक सेंस की कमी भी कोढ़ में खाज की तरह साबित हुई। अतिक्रमण, अव्यवस्थित ट्रैफिक से जाम लगता है।