इटावा। आगरा की विवाहिता ससुराल में उत्पीड़न का मसला लेकर न्याय के लिए इधर-उधर भटक रही है। उसका कहना है कि भाजपा के जिला कोषाध्यक्ष उसका मुकदमा दर्ज नहीं होने दे रहे।
आगरा के बाह कस्बे के गोपालजी गली निवासी शिल्पी पुत्री दिनेश शर्मा का विवाह करीब डेढ़ साल पहले फ्रेंड्स कॉलोनी के पीएसी गली निवासी युवक के साथ हुआ था। शिल्पी का आरोप है कि शादी के बाद से ही पति और ससुरालीजन दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगे। प्रताड़ना में पति ने सिगरेट से भी जलाया। आए दिन मारपीट से तंग आकर वह मायके चली गई थी। इटावा के भाजपा जिला कोषाध्यक्ष रघुवीर तिवारी ने समझौता कराके ससुराल वापसी कराई लेकिन उत्पीड़न थमा नहीं। रविवार को ससुराल में जबरन फिनायल पिला दिया गया।
हालत बिगड़ने पर अस्पताल ले गए। उपचार बाद कमरे में बंद कर दिया। फोन पर अपनी मां को सूचना दी तो उन्होंने यूपी 100 पर फोन करके पुलिस को अवगत कराया। इटावा पहुंची मां ने पुलिस की मदद से ससुरालियों से मुक्त कराया।
इसके बाद थाने जाकर शिकायत दी लेकिन भाजपा नेता रघुवीर के दबाव में पुलिस ने सुनवाई नहीं की। बुधवार को बच्चे के साथ पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार मिश्रा तक पहुंची विवाहिता ने कार्रवाई की मांग की। एसपी ने महिला थाने भेजा और कार्रवाई के लिए कहा। उधर फ्रेंड्स कॉलोनी थानाध्यक्ष अमित कुमार लखेरा का कहना है कि उन तक कोई महिला ऐसी शिकायत लेकर नहीं पहुंची।
सिविल लाइन थाने में लगी हिस्ट्रीशीटरों की सूची में रघुवीर तिवारी का भी नाम है। हालांकि उसमें लिखा पिता का नाम उनके पिता के नाम से मेल नहीं खाता। थाने के दीवान राजवीर सिंह ने बताया कि पिता का नाम मिसप्रिंट है। दो भाई भी हिस्ट्रीशीटर लिस्ट में हैं। डीजीपी के आदेश पर शहर में लगीं थानों के टॉपटेन बदमाशों की सूची में भी एक भाई का नाम है।
भाजपा जिलाध्यक्ष शिव महेश दुबे का कहना है कि रघुवीर ने अपने गांव में भाजपा का बस्ता लगाया था। इसके बाद उन पर केस दर्ज कराए गए। उनपर और उनके भाइयों पर दर्ज कई मुकदमे खत्म हो चुके हैं। अगर वह किसी महिला का मुकदमा दर्ज नहीं होने दे रहे तो इस पर उनसे बात की जाएगी। पद के प्रभाव का गलत इस्तेमाल नहीं होने देंगे।
दूसरी ओर सिविल लाइन थानाध्यक्ष मदन गोपाल गुप्ता का कहना है कि रघुवीर तिवारी और उनके दो भाई सिविल लाइन थाने के हिस्ट्रीशीटर हैं, उनके खिलाफ लूट समेत कई मुकदमे दर्ज हैं। मुकदमे खत्म होने की कोई जानकारी उन तक नहीं पहुंची है। अगर मुकदमे खत्म हो गए हैं तो हिस्ट्रीशीटरों की सूची से नाम हटा दिया जाएगा।