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चर्च जमीन कांडः अधिकारियों के नाम तलाशने का हुआ काम, खेल के अंदर हैं कई सफेदपोश

Sun, 10 Jun 2018 09:51 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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चर्च के बीच की टूटी बाउंड्री - फोटो : अमर उजाला
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यूपी के फतेहपुर जिले में विवादित जमीन मामले में रविवार को कार्रवाई की रफ्तार धीमी रही। अवकाश होने के कारण जांच आगे नहीं बढ़ सकी। तहसील में कुछ जिम्मेदारों को पचपन साल का इतिहास खंगालने के लिए जरूर लगा दिया गया।  
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दोपहर में तहसील मुख्यालय में इस बात को लेकर मशक्कत चलती रही कि 1963 से लेकर अब तक किस-किस पद पर कौन-कौन से अधिकारी और मुलाजिम तैनात रहे। किस अधिकारी और कर्मचारी की क्या भूमिका रही। कितने रिटायर और कितने का निधन भी हो चुका होगा। अपर जिलाधिकारी जेपी गुप्ता ने बताया कि उपजिलाधिकारी सदर प्रेमप्रकाश तिवारी को प्रथम दृष्टया दोषी पाए गए लोगों के आरोप पत्र बनवाने की जिम्मेदारी दी गई है। उन्होंने बताया कि अभी तक आरोप पत्र बनकर तैयार नहीं हुए हैं।  


पूरे प्रकरण में प्रथम दृष्टया अब तक केवल एक ही पक्ष सामने आया है। इस पूरे खेल में सत्ताधारी पार्टी से जुड़े और सफेदपोश भी अंदर तक संलिप्त बताए जा रहे हैं। जानकारों की मानें तो चर्च की तीन टुकड़ों की जमीन पर शिकायत और जांच हुई है लेकिन कार्रवाई सिर्फ एक ही दिशा की ओर अग्रसर है। जमीन दो अन्य बड़े हिस्सों में सत्तापक्ष के भी नेता, उनके बड़े भाई एवं अन्य नेता और तथाकथित संभ्रात लोगों ने बड़े पैमाने पर खरीद-फरोख्त की है। जुड़ी जमीन में तीन गाटा 20, 21 व 22 है। इसमें शिकायत केवल 20 की हुई है। जुड़े पक्षों का कहना है कि जब इसकी शिकायत हुई, कार्रवाई हो रही तो बाकी दो गाटा को क्यों छोड़ा जा रहा है।  
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चर्च के टूटे पड़े गेट और उंखड़ी टीन - फोटो : अमर उजाला
प्रकरण में एफआईआर होने के बाद विवेचना में जिन भी अधिकारियों का नाम उजागर होगा उनकी सीधे गिरफ्तारी हो सकती है। हलांकि नियमत: सरकारी अधिकारियों के विरुद्ध ऐसा करने से पूर्व नोटिस देनी होती है और अनुमति भी लेनी पड़ती है। मगर इस मामले में ऐसा ना होकर सीधे गिरफ्तारी हो जाएगी। 


फौजदारी मामलों के विशेषज्ञ अधिवक्ता अजीत सिंह राठौर ने बताया कि मुकदमा क्रिमिनल धाराओं में दर्ज हुआ है। उन्होंने बताया कि इस मामले में 419 और 420 तो जमानतीय अपराध की श्रेणी की धाराएं हैं। लेकिन 467, 468 व 471 आजीवन कारावास की धाराए हैं। अधिवक्ता अजीत सिंह राठौर कहते हैं कि चूंकि इस मामले में कई नाएब और तहसीलदार एवं उपजिलाधिकारी को मजिस्टे्रटी अधिकार होते हैं और तीनों विवेचक के ऊपर के कैडर के अधिकारी हैं। ऐसे में विवेचना संदिग्ध भी हो सकती है। इस मामले की विवेचना किसी स्वतंत्र एजेंसी से कराई जानी चाहिए। 


चर्च की 22 बीघा जमीन पर भूमाफिया के कब्जा कर बेचने के मामले में पुलिस को साक्ष्य जुटाने में पसीना छूट रहा है। पुलिस को मामले में पिछले कई दशकों को रिकार्ड खंगालना है।  
देवीगंज के चर्च प्रकरण की शुक्रवार रात पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। एफआईआर के दो दिन बीत चुके हैं। पुलिस अभी तक एफआईआर के आरोपियों के खिलाफ विवेचना में कोई कदम नहीं बढ़ा सकी है। पुलिस के सामने साक्ष्यों का संकलन चुनौती बना है। पुलिस की एक टीम तहसील, कलेक्ट्रेट, उपनिबंधक कार्यालय पहुंची। सभी कार्यालयों में ताला लटकता देखकर बैरंग लौट गई। विवेचक वीरेंद्र सिंह ने बताया कि दो दिनों की छुट्टी होने से जांच के साक्ष्य व तथ्य सामने नहीं आ सके हैं। अभिलेखों की जानकारी के बाद प्रकरण में नया कदम उठाया जा सकता है।   
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