जिला जेल में रायबरेली जेल से आए एक बंदी ने जेलकर्मी पर रुपये मांगने का आरोप लगाया। रुपये न देने पर प्रताड़ित करते हुए मारपीट की बात इलाज करने आए डाॅक्टर से कही। इसका वीडियो बनाकर किसी ने वायरल कर दिया। इस मामले की जांच हुई। जेल अधीक्षक ने बंदी पर जेल में दहशत फैलाने व मारपीट करने का आरोप लगाया है। मामले में प्रथम जांच रिपोर्ट के बाद इलाज करने वाले डॉक्टर को हटा दिया गया है।
रविवार को जेल में बंद बंदी रायबरेली निवासी माशूक अली के वायरल वीडियो में जेल वार्डर सहित दो पुलिस कर्मियों पर रुपये मांगने की बात कही। साथ ही रुपये न देने की बात कहने पर डंडे और लात-घूसों से पिटाई करने का भी आरोप लगाया है। उसके शरीर में कई जगहों पर गंभीर चोटें आई हैं। डाॅक्टर ने इलाज के बाद जिला अस्पताल रेफर किया है।
बंदी ने अधिकारियों से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई। बंदी ने जेल अधीक्षक पर भी कार्रवाई न करने का आरोप लगाया है। वीडियो वायरल होने के बाद आजाद सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित ठाकुर ने राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की है।
जेल अधीक्षक शशांक पांडेय ने बताया कि एटीएम फ्राॅड के मामले में कुछ दिन पूर्व रायबरेली जेल से माशूक उर्फ राजू , सुल्तानपुर का दिनेश व प्रतापगढ के सोनू को चित्रकूट जेल भेजा गया है। यह वीडियो पुराना है। जेल में जिस दिन यह बंदी आए तो इसमें माशूक ने अन्य बंदियों को पीटा और धौंस जमाकर कहा कि वह जेल की कोई डयूटी नहीं करेगा।
वार्डर वीरेंद्र मोहन व सिपाहियों से जब अन्य बंदियों ने शिकायत की तो उसे टोका गया। तब वह गाली देकर भागा उसे पकड़ने का प्रयास किया गया तो गिरने से मामूली चोट लगी है। डॉक्टर के पास इलाज कराते समय वायरल इस वीडियो की जांच हो रही है। डीएम को प्रथम रिपोर्ट भेजी गई है। इसमें डीएम के आदेश पर डॉ. मनोज सोनकर को हटा दिया गया है।