कानपुर। मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल स्क्रीन का बढ़ता इस्तेमाल बच्चों की आंखों की रोशनी के लिए खतरा बनता जा रहा है। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज और एलएलआर अस्पताल में किए गए दो वर्षीय अध्ययन में सामने आया है कि प्रतिदिन चार घंटे से अधिक समय तक स्क्रीन देखने वाले बच्चों में मायोपिया (निकट दृष्टिदोष) तेजी से बढ़ रहा है और आंखों की लंबाई सामान्य से अधिक बढ़ रही है। इससे भविष्य में रेटिना संबंधी बीमारियों, ग्लूकोमा और गंभीर दृष्टि हानि का खतरा भी बढ़ सकता है। इस अध्ययन को इंडियन मेडिकल जर्नल में प्रकाशन के लिए भेजा गया है।
मेडिकल कॉलेज नेत्र रोग विभाग की प्रोफेसर डॉ. पारुल सिंह के निर्देशन में जूनियर डॉक्टर एश्वर्या गुप्ता ने यह अध्ययन किया। उन्होंने बताया कि अध्ययन में तीन से 18 वर्ष आयु वर्ग के 250 बच्चों को शामिल किया गया। 24 महीनों तक इन बच्चों की आंखों की लंबाई, चश्मे का नंबर, स्क्रीन टाइम, पढ़ाई का समय, बाहरी गतिविधियों और विटामिन-डी के स्तर का मूल्यांकन किया गया। अध्ययन के अनुसार, प्रतिदिन चार घंटे से अधिक स्क्रीन का उपयोग करने वाले बच्चों में आंखों की लंबाई औसतन 0.52 मिलीमीटर तक बढ़ी जबकि दो घंटे से कम स्क्रीन देखने वाले बच्चों में यह वृद्धि केवल 0.36 मिलीमीटर रही। इसके साथ ही इन बच्चों में चश्मे का नंबर भी अधिक तेजी से बढ़ता पाया गया।
अध्ययन में यह भी सामने आया कि प्रतिदिन दो घंटे या उससे अधिक समय तक खुले मैदान में खेलने वाले बच्चों में मायोपिया की प्रगति काफी धीमी रही। विशेषज्ञों का कहना है कि प्राकृतिक सूर्य का प्रकाश आंखों के सामान्य विकास में मदद करता है और निकट दृष्टिदोष बढ़ने की गति को कम कर सकता है।
अध्ययन के दौरान यह भी पाया गया कि केवल पढ़ाई या अन्य निकट दूरी के कार्यों की तुलना में डिजिटल स्क्रीन का अत्यधिक उपयोग आंखों की संरचनात्मक वृद्धि पर अधिक नकारात्मक प्रभाव डालता है। वहीं, जिन बच्चों में विटामिन-डी की कमी पाई गई, उनमें मायोपिया बढ़ने की दर भी अधिक रही।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बचपन में मायोपिया की गति को नियंत्रित नहीं किया गया तो आगे चलकर रेटिना की बीमारी, ग्लूकोमा, मोतियाबिंद और गंभीर दृष्टि हानि जैसी समस्याओं का खतरा कई गुना बढ़ सकता है। अध्ययन यह संकेत देता है कि जीवनशैली में छोटे-छोटे बदलाव बच्चों की आंखों की रोशनी को लंबे समय तक सुरक्षित रखने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
इनसेट
बच्चों के लिए अभिभावकों को सलाह
- बच्चों का स्क्रीन टाइम सीमित रखें
- बच्चों को प्रतिदिन कम से कम दो घंटे बाहर खेलने के लिए प्रोत्साहित करें
- हर 20 से 30 मिनट के स्क्रीन उपयोग के बाद आंखों को आराम दें
- नियमित नेत्र परीक्षण कराएं