करेंसी की किल्लत से लोगों का धैर्य टूटने लगा है। जेब में पैसे की कमी होने से घर खर्च ही नहीं बच्चों की स्कूल फीस, दवा जैसी अहम जरूरतें पूरा कर पाना टेढ़ी खीर बन गया है। ऐसे में घर के बच्चे अपने पिग्गी बैंक ( गुल्लक) को तोड़ मम्मी-पापा की मदद कर रहे हैं।
बशर्ते बच्चे पैसा आने पर मम्मी-पापा से कुछ ज्यादा रकम वसूलना चाहते हैं, लेकिन यह भी सच है कि संकट के वक्त में उनकी गुल्लक वरदान साबित हुई है।
अर्थिक तंगी से जूझते मां-बाप बैंकों के चक्कर काटते-काटते परेशान हो चुके हैं। पुराने 500 व 1000 रुपये के नोट प्रचलन से बाहर होने के बाद से ही उन्हें इस कठिनाई से दो चार होना पड़ रहा है।
नोट बंदी के बाद हफ्ते भर में स्थिति सामान्य होने के तमाम दावे किए गए। मगर हालात सुधरने का नाम नहीं ले रहे। फिलहाल, एक चिंता यह सता रहा है कि बच्चों के पिगी बैंक का पैसा कितने दिन चल पाएगा।