चिड़ियाघर में डग्गामारी से चल रही ‘भ्रष्टाचार’ की बाल ट्रेन का इंजन गुरुवार को अचानक पलट गया। हादसे के दौरान बोगियों में बैठी 38 यात्रियों ने कूदकर अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि यह हादसा थोड़ी दूर पर बने पुल पर नहीं हुआ, वर्ना बड़ा हादसा हो सकता था। घटना के वक्त बाल ट्रेन को ड्राइवर का हेल्पर चला रहा था।
जू प्रशासन ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित कर दी है। सीएम के ड्रीम प्रोजेक्ट में शामिल बाल ट्रेन दो साल पहले 12.30 करोड़ की लागत से शुरू की गई थी। राजकीय निर्माण निगम ने इसके रखरखाव पर भी करोड़ों फूंक डाले लेकिन आज ट्रेन नियमित नहीं चल सकी।
हेल्पर के हाथ में थी ट्रेन
गुरुवार शाम ड्राइवर इम्तियाज ने बाल ट्रेन हेल्पर ऋषभ खन्ना को थमा दी। एक तो बगैर ब्रेक की ट्रेन ऊपर से अनाड़ी ड्राइवर। थोड़ी ही देर बाद भालू बाड़े के सामने ट्रेन का इंजन पटरी से अनियंत्रित होकर पलट गया। जू निदेशक दीपक कुमार ने पहुंचकर ट्रेन का हाल देख जांच कमेटी गठित कर दी।
बिना ब्रेक की थी
बाल ट्रेन के स्टेशन अधीक्षक आदित्य ने बताया कि चार महीने पहले ट्रेन का ब्रेक खराब हो गया था। इसे निर्माण निगम के इंजीनियर भी ठीक नहीं कर पा रहे थे। ड्राइवर इम्तियाज ने बताया कि ब्रेक लगाने के लिए इंजन का स्विच ऑफ करने पर ट्रेन 25 से 30 मीटर की दूरी पर जाकर थम जाती है। इसी तरह से काम चल रहा था।
दो इंजीनियर देखते हैं ट्रेन
करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी ट्रेन नियमित रूप से चली नहीं। कई बार ट्रैक धंसने के चलते ट्रेन पलटते-पलटते बची थी। भार कम करने के लिए एक बोगी को भी हटा दिया गया था। ट्रेन की देखरेख के लिए निर्माण निगम ने दो इंजीनियर भी लगाए हैं लेकिन समस्या जस की तस है।
गुजरात से आई थी
बाल ट्रेन का उद्घाटन मुख्यमंत्री ने लखनऊ से किया था। यह ट्रेन गुजरात से लाई गई थी। इसे चलाने के लिए 2.8 किमी ट्रैक बना है।