गर्भवती महिलाएं प्रेगनेंसी के दौरान जो कुछ भी खाती-पीती हैं वो खून के जरिए बच्चे तक पहुंचता है। इस दौरान गर्भवती को अगर खुशहाल माहौल मिलेगा तो उसके शरीर में सेराटोनिन, इंडोरफिन सरीखे अच्छे हारमोन बनेंगे, जो गर्भस्थ शिशु के विकास में सहायक होंगे।
तनावपूर्ण माहौल में गर्भवती के शरीर में कार्टिसोल, एडरीनलीन जैसे खराब हारमोन रिसेंगे। इससे नसें सिकुड़ती हैं और ब्लड सप्लाई बाधित होती है। इससे बच्चे में सहनशक्ति घटती है। तनावपूर्ण माहौल से बच्चों में आत्महत्या की प्रवृत्ति विकसित होने लगती है।
यह बात कानपुर स्थित मेडिकल कॉलेज के जच्चा-बच्चा अस्पताल में एक कार्यशाला में डॉ. संगीता सारस्वत ने बताई। बताया कि बच्चा पांच हजार शब्द मां के पेट में ही सीख लेता है। जन्म के बाद इन शब्दों का उच्चारण सुन बच्चा हरकत करने लगता है।