कानपुर के चकेरी ओमपुरवा में झोलाछाप डॉक्टर की बुखार की दवा की एक खुराक से शनिवार को 10 साल की बच्ची मौत की नींद सो गई। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने हंगामा काटा। यहां पहुंची पुलिस ने उन्हें समझाबुझाकर शांत कराया। उसने तहरीर पर पोस्टमार्टम के बाद कार्रवाई की बात कही। अपनी मासूम बेटी की पोस्टमार्टम की बात सुनकर परिजन पीछे हट गए। वहीं इलाके का निवासी चंद्रा दुकान बंद कर फरार है। बताया जा रहा है कि वह डेढ़ दशक से वह लोगों का इलाज कर रहा है।
चकेरी के ओमपुरवा निवासी रमेश चंद्र वर्मा मजदूरी करते हैं, उनकी पत्नी छाया भी एक बेल्ट बनाने के कारखाने में काम कर परिवार पालती है। उनके तीन बच्चों में सबसे बड़ा 11 साल के बेटे सूरज से छोटी बेटी महक (10) इलाके के अंतर्ज्ञान स्कूल में कक्षा तीन में पढ़ती है। तीसरे नंबर की बेटी वैष्णवी 3 साल की है।
शुक्रवार रात बड़ी बेटी महक को बुखार आ गया। रमेश दवा के लिए निकले तो दुकानें बंद हो चुकी थी। इसपर वह शनिवार सुबह 10:30 बजे इलाके में नई बस्ती स्थित झोलाछाप चंद्रा की क्लीनिक पहुंचे। जहां से महक को दवा दिलाकर घर ले गए। घर में दवा की एक खुराक खाने के 10 मिनट बाद महक के मुंह से झाग निकलने लगा। वह बेहोश हो गई। परिजन भागकर चंद्रा के पास पहुंचे। चंद्रा ने घर पहुंचकर महक को दूसरी जगह ले जाने की बात कही।
महक की मां छाया ने बताया कि वह बेटी को लेकर लालबंगला स्थित डॉ. चंदन खेड़ा की क्लीनिक ले गई। वहां से जवाब मिलने के बाद इलाके के डॉ. एके डे क्लीनिक ले गई, जहां उसे बताया कि महक की सांसे थम चुकी हैं। इसके बाद परिजनों ने विरोध कर हंगामा किया। मां छाया का कहना है कि अब बेटी चली गई, उसका पोस्टमार्टम कराकर क्या फायदा होगा। बगैर क्लीनिक बोर्ड से धड़ल्ले से इलाज चंद्रा ने एक मकान में क्लीनिक खोल रखी है, उसमें उनकी योग्यता संबंधी कोई बोर्ड नहीं लगा है।
हद है कि स्वास्थ्य विभाग के अफसर 15 साल से चल रही क्लीनिक से अनजान रहे। बताया जा रहा है कि डॉक्टर के पिता शिक्षा विभाग में अध्यापक हैं, उनके दो भाई इलाके में ही स्टेशनरी की दुकान किए हैं। मामले में सीएमओ डॉ. अशोक शुक्ला से बात करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कमिश्नर की बैठक में होने की बात कही। वहीं चकेरी इंस्पेक्टर प्रमोद कुमार शुक्ला का कहना है कि मामले में परिजनों से तहरीर मांगी गई थी, लेकिन अभी तक नहीं मिली। इसलिए पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। जिससे मौत का कारण स्पष्ट हो सके।