ब्याहता लड़की के हाथ देखे गए तो चूड़ियां नहीं थीं। पैरों में बिछियां भी नहीं थे, लेकिन उनके निशान जरूर बने थे। बाद में मंडप पर बैठने से मना कर दिया गया। बताया गया है कि शादी और योजना का लाभ देने के लिए कई नेताओं के फोन अधिकारियों के पास पहुंचे, लेकिन उसे बैठने नहीं दिया गया। कई लोग कहते रहे कि 51 हजार रुपये के लालच में दोबारा शादी करने के लिए भी लोग जमीर बेच देते हैं।
जब सत्यापन हुआ था, तो लड़की की शादी नहीं हुई थी। अगर मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना की घोषित तारीख से एक दिन पहले भी कोई शादी कर लेता है तो अपात्र होता है। तथ्य छिपाकर योजना का लाभ लेने पर वसूली की जाती है। -अमित सिंह, बीडीओ तालग्राम