फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

मुख्यमंत्री का पारा देख पसीना पसीना हुए सुखराम

Sat, 13 Dec 2014 02:06 AM IST
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
विज्ञापन
विज्ञापन
मंच पर चढ़ने को लेकर हंगामा करने और प्रशासनिक अधिकारियों की सीट पर जबरन बैठने से नाराज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने आज यहां सपा नेताओं और कार्यकर्ताओं को आड़े हाथों लिया।
विज्ञापन

साफ कहा कि जो लोग मंच पर चढ़ने के लिए सुरक्षा कर्मचारियों से लड़ रहे थे, उनके खिलाफ कार्रवाई जरूर करूंगा। जो मेरा सम्मान नहीं करते, उनसे दूसरों को सम्मान देने की अपेक्षा नहीं की जा सकती है।
मुख्यमंत्री ने सबसे ज्यादा खरी-खोटी विधान परिषद के पूर्व सभापति चौधरी सुखराम सिंह को सुनाई। एक मामले को लेकर ऐसी झाड़ पिलाई कि एसी हाल और सर्दी में भी मुख्यमंत्री के साथ मंच पर बैठे चौधरी सुखराम सिंह माथे का पसीना पोंछते नजर आए और शायद यही वजह रही कि वे बाद के कार्यक्रमों में नजर नहीं आए।
विज्ञापन

शुक्रवार की सुबह 11:30 बजे मुख्यमंत्री अखिलेश यादव चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कैलाश भवन सभागार पहुंचे।
यहां गरीब परिवारों को आर्थिक सहायता और योजनाओं का लाभ देने का कार्यक्रम शुरू हुआ। इसी बीच सपा जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश मिश्रा और नीलम रोमिला सिंह मंच पर चढ़ने लगे।
इस पर मुख्यमंत्री के सुरक्षा कर्मचारियों ने आपत्ति की और बहस होने लगी। यह देख डीएम डॉ. रोशन जैकब ने हस्तक्षेप किया और सपा के दोनों पदाधिकारियों को मंच पर जाने दिया।
इसके बाद पूर्व सांसद राकेश सचान और अमिताभ बाजपेयी सहित तमाम अन्य नेता मंच पर जाने लगे। इस पर भी सुरक्षा कर्मचारियों ने ऐतराज जताया, जिसे सपा नेताओं ने नजर अंदाज कर दिया।
इस कारण कहासुनी हुई और एक बार फिर डीएम के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। मुख्यमंत्री ने सारी नाराजगी चौधरी सुखराम सिंह पर उतारी। किसी मामले को लेकर मुख्यमंत्री ने झल्लाहट दिखाई और एक व्यक्ति को आर्थिक सहायता देने का चेक चौधरी सुखराम को पकड़ाने की कोशिश की।
कहा लीजिए आप ही चेक बांट दीजिए। इससे सकपकाए चौधरी थोड़ा दूर जाकर खड़े हो गए। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री ने सुखराम से यहां तक कह दिया कि अंदर से विरोध करते हैं, लेकिन बाहर से सगा बनने की कोशिश करते हैं।
यह सब अब नहीं चलेगा। जो काम करेगा, वही पार्टी में सम्मान से रहेगा। जिसे पार्टी छोड़कर जाना है, जा सकता है। मुख्यमंत्री की नाराजगी का ही असर रहा कि चौधरी सुखराम प्रशासनिक भवन के बाहर मैदान में लगे कार्यक्रम को देखने तक नहीं गए। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर उड़कर चला गया और वह प्रशासनिक भवन के पास खड़े होकर देखते रहे।
इससे पहले सरकारी कार्यक्रम के मंच पर लगी कुर्सी पर बैठने को लेकर छीना झपटी हुई। मंत्री, विधायकों में कुर्सी खींचकर बैठने की होड़ सी दिखी।  
नतीजा यह रहा कि कमिश्नर, डीएम, केडीए वीसी, केस्को एमडी सहित तमाम प्रशासनिक अधिकारियों को पीछे की कुर्सी पर बैठना पड़ा।
यहीं कैलाश भवन के मंच के सामने जो कुर्सी प्रशासनिक अधिकारियों के लिए लगी थी, उस पर भी सपाइयों ने कब्जा जमा लिया था। यही देखकर मुख्यमंत्री भड़क उठे।
संबोधन के लिए माइक पकड़ते ही पहले सपाइयों को अनुशासन का पाठ पढ़ाना शुरू कर दिया। गुस्से से कहा कि अनुशासन ही समाज में अच्छा संदेश देता है, जो कि सपा नेता नहीं दे पा रहे हैं।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री ने इशारों-इशारों में ही सपा के बड़े नेताओं पर हमला बोला। कहा कि कार्यकर्ता को सम्मान देकर ही पार्टी को आगे बढ़ाया जा सकता है।
खास करके उन कार्यकर्ताओं की जो फरवरी 2012 के पहले से पार्टी से जुड़े हैं। जो लोग सरकार बनने के बाद आए हैं, वह सरकार जाने के बाद चले भी जाते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें