कानपुर में बचपन में लगी चिकन पॉक्स की वैक्सीन भी मंकी पॉक्स से सुरक्षा चक्र प्रदान करती है। इसके लक्षण दो-चार सप्ताह रहते हैं। इसके बाद वायरस खुद मर जाता है। हालांकि कुछ रोगियों में जटिलताएं आ सकती हैं, जिससे खतरा पैदा होता है।
वैसे देश में मंकी पॉक्स का रोगी नहीं मिला लेकिन शासन ने गाइडलाइन जारी कर दी है। केस रिपोर्टिंग के लिए फॉर्म और सैंपल इकट्ठे करने की भी व्यवस्था हो गई है। इसके साथ ही कनाडा, ब्रिटेन, अमेरिका और यूरोप से शहर आने वालों पर नजर रखी जाएगी। इसके पहले कोरोना और जीका का भी संक्रमण बाहर से आने वालों के साथ आया था।
विशेषज्ञों ने बताया कि मंकी पॉक्स और चेचक के लक्षण मिलते-जुलते हैं। मंकी पॉक्स चेचक से कम संक्रामक होता है। गाइडलाइन में बताया गया कि अभी तक इस बीमारी का संक्रमण अफ्रीकी देशों की यात्रा करने वालों में मिला है। इसमें कहा गया है कि यह संक्रमण कटी-फटी त्वचा, सांस, नाक और आंख से शरीर के अंदर पहुंच जाता है।