शहर की नहरों और कृत्रिम तालाबों के किनारों पर गुरुवार को भव्य मेले जैसा नजारा देखने को मिला। केलवा के पात पे उगा हो सूरज देव...पहिले पहिल छठी मइया...छठी मइया के दिहल ललनवा... जैसे तमाम गीत गाते हुए महिलाओं ने शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य देकर पूजा-अर्चना की।
शहर में अलग ही रौनक देखने को मिली
पूजा करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
छठ महापर्व के तीसरे दिन शाम को शहर में अलग ही रौनक देखने को मिली। अर्मापुर नहर, पनकी नहर, कैंट के सत्तीचौरा घाट, मस्कर घाट, गोलाघाट, कोयला घाट, डबकेश्वर घाट, ग्वालटोली के गंगा किनारे सहित अन्य कृत्रिम तालाबों पर करीब पांच बजे ही महिलाओं का घाट पर पहुंचना शुरू हो गया था।
ढोल-नगाड़े के साथ भरी मन्नत की कोसी
छठ पूजा करती महिलाएं
- फोटो : अमर उजाला
फल, फूल, पुआ, पूड़ी, ठेकुआ और पूजा सामग्री से भरी डलिया, डलवा और सूप लेकर घाटों और कृत्रिम तालाबों पर महिलाएं पहुंचीं। इसके बाद महिलाओं ने वेदी पर दीपक जलाकर पूजन सामग्री चढ़ाई और छठ मइया की आरती उतारी। ढोल-नगाड़े के साथ आए परिवार के अन्य सदस्यों ने मन्नत की कोसी भरी। इसके बाद सूर्य देवता को अर्घ्य देकर बच्चों की लंबी उम्र की कामना की।