जरूरतमंद छात्रों को दी जाने वाली शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति का दुरुपयोग करने वाले कॉलेज संचालकों की अब खैर नहीं। निदेशक समाज कल्याण ने कुछ दागी कॉलेजों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
समाज कल्याण विभाग ले रहा है एक-एक छात्र को दी गई छात्रवृत्ति का हिसाब
डेमो पिक
कानपुर- समाज कल्याण विभाग एक-एक छात्र को दी गई छात्रवृत्ति का हिसाब ले रहा है। शासन स्तर पर कुछ मामलों की शिकायत के बाद विभाग हरकत में आया है। समाज कल्याण विभाग जिले के सभी राजकीय, अनुदानित और स्ववित्तपोषित विद्यालय, महाविद्यालय में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को शुल्क प्रतिपूर्ति और छात्रवृत्ति देता है।
बीटेक, एमटेक, एमबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्स में पचास से साठ हजार रुपये तक प्रतिवर्ष शुल्क प्रतिपूर्ति दी जाती है। शहर के कुछ स्ववित्तपोषित महाविद्यालय छात्रों को मिलने वाली धनराशि को हजम कर रहे हैं। पिछले साल पनकी, महाराजपुर, चौबेपुर स्थित कुछ कॉलेजों के छात्रों ने लिखित रूप से शिकायत की थी कि उनसे शुल्क प्रतिपूर्ति के रूप में मिलने वाली धनराशि जबरन वसूली जा रही है। समाज कल्याण विभाग में इसकी शिकायत भी की गई जांच भी हुई लेकिन छात्रों को इंसाफ नहीं मिला। विभगीय सूत्रों के मुताबिक शहर के कुछ दागी कॉलेजों की शिकायत शासन स्तर पर हुई है इसके बाद वहां से जांच कराने के आदेश दिए गए हैं।
छात्रों से हो सकती है पूछताछ
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सूत्रों के मुताबिक कॉलेजों से डाटा मिलने के बाद किसी भी छात्र से पूछताछ हो सकती है। ज्यादातर मामले ऐसे हैं जहां छात्रों के अकाउंट से अपने आप धनराशि निकाल ली गई है। छात्राें से बात के बाद स्थिति स्पष्ट होगी।
कुछ कॉलेजों में शुल्क प्रतिपूर्ति की शिकायतें मिली हैं। इसे देखते हुए शासन से कॉलेजों के जांच कराने का आदेश मिला है। शहर के कुछ प्रमुख कॉलेजों से शुल्क प्रतिपूर्ति का हिसाब लिया जा रहा है। छात्रों का विवरण भी लिया जाएगा।
अमरजीत सिंह, समाज कल्याण अधिकारी