नबीपुर में बंबे के किनारे छठ पूजा के लिए वेदी बनाती महिलाएं
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कानपुर देहात। नहाय-खाय के साथ बुधवार को चार दिन तक चलने वाले छठ महापर्व की शुरुआत हो गई। कोरोना काल के बावजूद छठ पूजा को लेकर लोगों में काफी उत्साह दिखाई दे रहा है। जलाशयों के किनारे सफाई कर छठ पूजन के लिए घाट बनाए गए। गुरुवार को खरना होगा।
छठ पूजा के चलते नहाय खाय की तैयारी मंगलवार को श्रद्धालुओं ने कर ली थी। बुधवार सुबह उठने के बाद विधिविधान से भोजन बनाया गया। इस दिन का खाना भी विशिष्ट होता है। महिलाओं ने चावल, चने की दाल व लौकी की सब्जी ग्रहण की। नहाय-खाय वाले दिन से छठ पर्व की शुरुआत मानी जाती है और महिलाएं गेहूं को भिंगोकर सुखातीं है। सुबह से नदी, पोखरों व जलाशयों के घाटों पर व्रतियों की भीड़ लगी रही। यहां व्रतियों ने छठ का प्रसाद बनाने के लिए गेहूं धोया। इसके बाद व्रती महिलाओं ने एक-दूसरे की मांग में सिंदूर लगाया। नहाय-खाय के बाद अब महिलाएं खरना की तैयारी में जुट गई हैं। गुरुवार को खरना है और इसदिन व्रती गुड़ व चावल की विशेष खीर बनातीं है। व्रती महिलाओं के खाने के बाद इसे लोगों में प्रसाद के रुप में वितरित किया जाता है।
आचार्य प्रियंक दीक्षित ने बताया कि चार दिवसीय महापर्व के प्रथम दिन नहाय-खाय कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि से छठ पूजा का आरंभ होता है। बुधवार को नहाय-खाय का दिन रहा। पंचमी तिथि को छठ पूजा का दूसरा दिन खरना इस बार गुरुवार को होगा। तीसरे दिन यानि छठ पूजा का मुख्य दिन और कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को संध्या के समय डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। कार्तिक मास में शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि यानि चौथे दिन 21 नवंबर दिन शनिवार को सूर्योदय के समय अर्घ्य देने के पश्चात छठ के व्रत का पारण और समापन किया जाएगा।