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Kanpur News: बदलते तापमान व कोहरे से फसलों में कीट व रोगों का खतरा

Mon, 22 Dec 2025 12:37 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
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कानपुर देहात। दिलीप नगर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिकों ने बदलते तापमान व कोहरे की वजह से फसलों में कीट व रोगों का खतरा बताया है। किसानों को सतर्क करने की सलाह जारी की गई है।
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मृदा वैज्ञानिक डॉ. खलील खान ने बताया कि गेहूं की बुवाई के 20 से 30 दिन के मध्य पहली सिंचाई के बाद पौधों में जिंक की कमी के लक्षण दिखें तो पांच किग्रा जिंक सल्फेट व 16 किग्रा यूरिया को 800 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करना चाहिए। उन्होंने बताया कि संकरी पत्ती व चौड़ी पत्ती के खरपतवारों के एक साथ नियंत्रण के लिए सल्फो सल्फ्यूरान 75 प्रतिशत व मेटा सल्फ्यूरॉन मेथाइल पांच प्रतिशत डब्लूजी 40 ग्राम (2.5 यूनिट) 1250 मिली सर्फेक्टेंट प्रति हेक्टेयर छिड़काव करना चाहिए।
राई, सरसों में नत्रजन की टॉप ड्रेसिंग करें। नमी कम होने पर हल्की सिंचाई करें। लीफ माइनर के नियंत्रण के लिए डाईमेथोएट 30 प्रतिशत ईसी 650 मिली प्रति हेक्टेयर या कार्बोफ्यूरान तीन प्रतिशत सीजी 66 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से 300 लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। चने में कटुआ कीट के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ईसी की 2.5 लीटर मात्रा को 500 से 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टयर की दर से छिड़काव करें। खेत में जगह जगह सूखी घास के छोटे-छोटे ढ़ेर को रख देने से दिन में कटुआ कीट की सूड़ियां छिप जाती हैं, इसे सुबह समय में एकत्र कर नष्ट कर देना चाहिए। टमाटर, मिर्च फसल में विषाणु रोग का प्रकोप अधिक हो तो इसका फैलाव राकने के लिए डाईमिथोएट या इमिडाक्लोप्रिड एक मिली को प्रति लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।
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