कानपुर। हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी में दो चरणों में हुई पांच राउंड काउंसलिंग के बाद भी लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी विभाग की 31 सीटों में से मात्र दो ही भर पाई हैं। जबकि इस साल विभाग की ओर से सीटें भरने के लिए काफी मशक्कत की गई। लेदर टेक्नोलॉजी विभाग का नाम बदलकर लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी किया गया, उद्योगों की जरूरत के अनुसार कोर्स को तैयार किया गया, कई उद्योगपतियों को भी इसमें शामिल कर पाठ्यक्रम में बदलाव किए गए, लेकिन नतीजा सिफर रहा।
एचबीटीयू में पिछले काफी समय से लेदर टेक्नोलॉजी विभाग की हालत खराब है। पिछला साल छोड़ दें तो अन्य वर्षों में पूरा जोर लगाने के बाद भी भरने वाली सीटें दहाई का आंकड़ा तक नहीं पार कर पाती है। विवि ने कई बार विभाग को बंद करने की प्लानिंग तक की है। पिछले साल इस पर गंभीर मंथन हुआ और विवि के कई सीनियर प्रोफेसरों को इसमें बदलाव कर आगे बढ़ाने का जिम्मा सौंपा गया।
प्रोफेसरों ने सबसे पहले इसका नाम लेदर टेक्नोलॉजी की जगह लेदर इन फैशन टेक्नोलॉजी रखने का सुझाव दिया। उनका तर्क था कि लेदर नाम से छात्र केवल टेनरी उद्योग को ही समझते है, जबकि फैशन इंडस्ट्री में लेदर का बड़ा स्कोप है। इसके बाद शहर के लेदर इंडस्ट्री के लोगों से बात की गई। उनके सुझाव को लेकर बदलाव किए गए। हालांकि विभाग को उम्मीद थी कि इस बार सीटें भरेंगी, लेकिन ऐसा हुआ नहीं। विवि में दो चरणों में पांच राउंड काउंसलिंग हुई जिसमें सिर्फ दो सीटें ही भरीं। अब 12 अगस्त को होने वाली ऑनलाइन स्पॉट काउंसलिंग से ही कुछ उम्मीदें बची हैं। डीन एकेडमिक्स ललित कुमार सिंह का कहना है कि कई बार स्पॉट काउंसलिंग में कई दाखिले हो जाते हैं। उम्मीद है कि शेष सीटें इससे भर जाएंगी। छात्र 10 अगस्त तक पंजीकरण करा लें।
फूड, प्लास्टिक, केमिकल ब्रांच का बुरा हाल
छात्र इंजीनियरिंग की कोर ब्रांच के पीछे ही भाग रहे हैं। यही कारण है एचबीटीयू में कंप्यूटर साइंस, आईटी, इलेक्ट्रानिक्स, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल की सभी सीटें फुल हो चुकी हैं। फूड, प्लास्टिक, केमिकल ब्रांच का बुरा हाल है। केमिकल में 63 में 14, फूड में 63 में 13, प्लास्टिक में 63 में 24 सीटें ही भर पाई हैं।