वर्ष 2005 के पहले के हजार और पांच सौ के नोटों को शहर की लगभग साढ़े चार सौ बैंक शाखाओं में बदला जा सकेगा। सभी बैंक दावा कर रहे हैं कि उनकी किसी भी शाखा से नोट बदले जा सकते हैं। बैंक अधिकारियों के मुताबिक इनके लिए कोई स्पेशल काउंटर नहीं बनाया गया है।
कैश काउंटरों पर ही इन्हें बदला जा सकता है। किसी तरह की परेशानी पर शाखा प्रबंधक से संपर्क किया जा सकता है। इन नोटों को एक जनवरी के पूर्व बदलना है।
पीएनबी के डीजीएम नेहाल अहद ने बताया कि हर शाखामें यह व्यवस्था की गई है कि इस प्रकार के नोट लेकर बैंक उन्हें नॉन इश्युएबल श्रेणी में अलग कर देगा।
ये नोट किसी भी प्रकार से सर्कुलेशन में नहीं आएंगे। इन्हें आरबीआई में जमा किया जाएगा। उन्होंने बताया कि ग्राहकों से यह भेदभाव नहीं किया जा रहा है कि वे पीएनबी के ग्राहक हैं या नहीं।
नोट बदलने के लिए किसी प्रकार के स्पेशल काउंटर की आवश्यकता नहीं है। नोटों की जांच के लिए अल्ट्रावॉयलेट लैंप और दूसरे इंतजाम किए गए हैं, जिससे नकली नोटों की पहचान की जा सके।
उधर बैंक ऑफ बड़ौदा और एसबीआई में भी नोट बदलने का काम चल रहा है। बॉब के एक अधिकारी ने बताया कि किसी भी शाखा में नोट बदले जा सकते हैं।
काफी हद तक नोट बदले भी जा चुके हैं।
उन्होंने अंतिम तिथि बढ़ने की बात पर कहा कि बेहतर यही है कि लोग एक जनवरी के पूर्व अपने करेंसी नोटों को एक्सचेंज कर लें। उन्होंने बताया कि नोट बदलने के लिए किसी प्रकार का आईडी प्रूफ नहीं लिया जा रहा है।
ब्लैक मनी निकलेगी बाहर
कानपुर। इस कवायद के पीछे सबसे बड़ी मंशा है कालेधन को बाहर लाना। एसबीआई के एक अधिकारी ने बताया कि हजार और पांच सौ के जितने नोट जारी किए जाते हैं, उसमें काफी संख्या में नोट वापस बैंक में नहीं आते हैं। यह पैसा कालेधन के रूप में जमा हो जाता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति तक घूमता रहता है। यह कवायद इस पैसे को बाहर लाने में मदद करेगी, क्योंकि इस तिथि के बाद ये नोट चलन से बाहर हो जाएंगे। वहीं एक जनवरी के बाद पचास हजार रुपये से ज्यादा की राशि के नोट बदलने की दशा में पैन और आईडी प्रूफ देना होगा। अभी यह औपचारिकता नहीं करनी होगी।