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Kanpur News: चंडीगढ़ विश्वविद्यालय ने जीती मूट कोर्ट प्रतियोगिता, मिला 51 हजार का इनाम, लखनऊ दूसरे स्थान पर

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मूट कोर्ट प्रतियोगिता के विजेता को पुरस्कृत करते अतिथि।  - फोटो : संस्थान
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कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में आयोजित चतुर्थ एआईयू मूट कोर्ट प्रतियोगिता में चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी की टीम विजेता बनी। रविवार को हुए फाइनल मुकाबले के बाद विजेता टीम को 51 हजार रुपये का पुरस्कार मिला है। दूसरे स्थान लखनऊ यूनिवर्सिटी की टीम रही।
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विवि के अटल बिहारी वाजपेयी विधि संस्थान में आयोजित फाइनल मुकाबले में दोनों ही टीमों ने प्रतिभा का दमदार प्रदर्शन करते हुए अपना–अपना पक्ष रखा। दो घंटे की तीखी बहस को सुनने के बाद न्यायपीठ ने अपना फैसला सुरक्षित रखते हुए मूट कोर्ट रूम को स्थगित किया। समापन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अब्दुल मोइन शामिल हुए।

उनका स्वागत विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने किया। न्यायाधीश अब्दुल मोइन के अलावा जिला एवं सत्र न्यायालय कानपुर नगर के प्रदीप कुमार सिंह, न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय रामाबाईनगर जय प्रकाश तिवारी एवं प्रतिकुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, बिजनेस मैनेजमेंट से डीन प्रो. सुधांशु पांड्या ने विजेताओं को ट्रॉफी एवं कैश प्राइज देकर सम्मानित किया।
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प्रतियोगिता की विजेता चंडीगढ़ विश्वविद्यालय की टीम को 51,000 रुपये के साथ ट्रॉफी, सर्टिफिकेट दिया गया। वहीं, दूसरे स्थान पर रही लखनऊ विश्वविद्यालय की टीम को 21,000 रुपये के साथ ट्रॉफी एवं सर्टिफिकेट दिया गया।

गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय को सर्वश्रेष्ठ मेमोरियल के लिए, रामा विश्वविद्यालय के छात्र सागर मिश्रा को सर्वश्रेष्ठ शोधकर्ता के लिए व सिम्बायोसिस लॉ स्कूल नागपुर के छात्र अथर्व अभ्यंकर को सर्वश्रेष्ठ वक्ता के लिए 5,100 रुपये के साथ ट्रॉफी एवं सर्टिफिकेट प्रदान किया गया। कार्यक्रम में डॉ. शशिकांत त्रिपाठी, डॉ. दिव्यांशु शुक्ला, मयूरी सिंह, समरेंद्र सिंह, डॉ. स्मृति रॉय, डॉ. राहुल तिवारी मौजूद रहे।

आत्मविश्वास अच्छा, अति आत्मविश्वास करता है निराश
समापन समारोह में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायाधीश अब्दुल मोइन ने प्रतिभागियों की ओर से की गई जिरह की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि छात्रों में आत्मविश्वास होना चाहिए लेकिन अतिआत्मविश्वास से व्यक्ति को निराशा हाथ लगती है। असफलता भी हमें कुछ न कुछ सिखाती है, असफलता से हमें अपनी कमजोरियों को जानने और उनसे पार पाने का अवसर मिलता है। विशिष्ट अतिथि जिला एवं सत्र न्यायालय कानपुर नगर के न्यायाधीश प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि न्याय बिना मूल्यांकन के संभव नहीं है। न्यायाधीश जिला एवं सत्र न्यायालय रामाबाईनगर जय प्रकाश तिवारी ने कहा कि व्यक्ति छात्र जीवन से ही सफलता की ऊंचाइयों को छूता है। हर पेशे में ईमानदारी को बनाए रखें।
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