- रातभर जागते रहे चंबल की तलहटी में बसे गांवों के लोग
- बुधवार शाम जलस्तर घटकर 117.93 मीटर पर पहुंचा
संवाद न्यूज एजेंसी
चकरनगर। पिछले दो दिनों से तेजी के साथ बढ़ रहा चंबल का जलस्तर मंगलवार रात को स्थिर हो गया। इसके बाद धीरे-धीरे जलस्तर घटना शुरू हो गया। हालांकि अभी भी खतरा बरकरार है।
सुरक्षा चौकियाें के साथ गांव के लोग भी रातभर जागते हुए नदी के जलस्तर पर लगातार नजर बनाए रहे। रात जलस्तर बढ़कर 119.20 मीटर पर पहुंचकर स्थिर हुआ। इसके बाद धीरे-धीरे जलस्तर गिरना शुरू हुआ और बुधवार शाम चंबल नदी का जलस्तर गिरकर 117.93 मीटर पर आ गया। जबकि चेतावनी निशान 119.80 मीटर पर और खतरे का निशान 120.80 मीटर पर है।
कोटा बैराज से सोमवार को पानी छोडे़ जाने के बाद से चंबल का जलस्तर तेजी के साथ बढ़ना शुरू हो गया था। मंगलवार को चौबीस घंटे के अंदर ही चंबल का जलस्तर छह मीटर तक बढ़ गया था। ऐसे में चंबल के आसपास के क्षेत्र में बाढ़ का खतरा मड़राने लगा था।
प्रशासन के साथ चंबल के आस पास स्थित लगभग 74 गांव के लोगों को बाढ़ का डर सताने लगा था। यही कारण रहा कि मंगलवार की रात इस क्षेत्र के गांवाें के लोगों को नींद नहीं पड़ी। ज्यादातर लोग रात भर जागते रहे और इधर उधर से नदी के बढ़ते जलस्तर की जानकारी लेते रहे। जहां मंगलवार की शाम तक जलस्तर 118.95 मीटर पर था तो वहीं रात नौ बजे तक जलस्तर बढ़कर 119.20 तक जा पहुंचा।
इसके बाद बढ़ रहा पानी स्थिर हुआ और रात 10 बजे तक जलस्तर थमा रहा। इसके बाद बहुत ही धीमीं गति से जलस्तर गिरना शुरू हुआ और सुबह जलस्तर घटकर 119.10 पर आ पहुंचा। दोपहर होते होते यह 117.99 पर आ पहुंचा और शाम को जलस्तर 118.95 पर आ गया।
जलस्तर में आई इस गिरावट से आसपास क गांव के लोगों ने राहत की सांस ली। जबकि एक दिन पहले तक स्थित यह आ गई थी कि कई गांव के लोगों ने तो अपने घरों को खाली करने की तैयारी कर ली थी। एसडीएम ब्रह्मानंद सिंह ने बुधवार शाम को पुल से चंबल के जल स्तर का जायजा लिया और अधीनस्थ कर्मचारियों को नजर बनाए रखने का आदेश दिया।
चंबल का जलस्तर
मंगलवार शाम पांच बजे- 118.95
मंगलवार रात 9 बजे - 119.20
मंगलवार रात 10 बजे- 118.68
बुधवार सुबह 10 बजे- 118.18
बुधवार दोपहर 2 बजे- 117.99
बुधवार शाम 5 बजे- 117.93
उदी क्षेत्र के लोगों में भी राहत
उदी। चंबल नदी के जलस्तर में आई गिरावट के बाद बढ़पुरा क्षेत्र के गांवों के लोगों ने भी राहत की सांस ली। मंगलवार रात चार से पांच सेंटीमीटर प्रति घंटे के हिसाब से जलस्तर में गिरावट दर्ज की गई। जलस्तर बढ़ने से पानी बढ़पुरा इलाके के ग्राम मडैया पछायंगाव के करीब पहुंच गया था, जिससे गांव के लोगों की धड़कने तेज होने लगी थीं। वहीं बुधवार को जब जलस्तर में गिरावट आई तो गांव के लोगों की जान में जान आई। इसके साथ साथ आसपास के गांव के लोगों को भी बाढ़ का खतरा सताने लगा था। इन गांव के लोगों ने भी जब यह सुना की नदी में पानी कम हो रहा है तो सभी खुश होकर एक दूसरे को मोबाइल से इसकी जानकारी देने लगे। (संवाद)