कानपुर। झांसी में घूसकांड के बाद सीजीएसटी विभाग फिर से चर्चा में है। विभाग में किए गए सैकड़ों तबादले नियम विरुद्ध पाए गए हैं। कई अफसरों ने केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (कैट) का रुख किया था। कैट से स्टे मिलने के बाद वे सभी पुरानी जगहों पर कार्य कर रहे हैं। इससे विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
कुछ समय पहले विभाग के इतिहास का सबसे बड़ा फेरबदल हुआ था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईंधन संकट के चलते वर्क फ्रॉम होम की अपील की थी। इसके बावजूद उच्च अफसरों ने 12 मई को 354 सुपरिंटेंडेंट और 102 इंस्पेक्टरों का तबादला किया। 23 अप्रैल को 32 सहायक आयुक्तों का भी तबादला हुआ था।
इन तबादलों में सेवानिवृत्ति के करीब अफसरों को भी दूसरे शहरों में भेजा गया, जबकि कई अफसर 15-15 सालों से एक ही जिले में जमे हुए थे। कानपुर, आगरा, लखनऊ और प्रयागराज कमिश्नरी के अफसरों के तबादलों में नियमों को दरकिनार किया गया। पूर्व में प्रमोशन होने पर तबादला नहीं हुआ था, लेकिन अब कर दिया गया। तबादला सूची जारी होने के बाद अधिकारी अवकाश पर चले गए, जिससे लाखों रुपये का खर्च भी हुआ।