दिल्ली-हावड़ा रूट की ट्रेनों की लेटलतीफी का बड़ा कारण माने जाने वाले सेंट्रल के प्लेटफार्मों का जल्द सुधार होगा। सभी प्लेटफार्मों की लंबाई और चौड़ाई बढ़ाई जाएगी। इससे लंबी रेक वाली बोगियों को किसी भी प्लेटफार्म पर खड़ा किया जा सकेगा। अभी पूर्वोत्तर राज्यों और मुंबई समेत लंबी दूरी की ज्यादा बोगियों वाली ट्रेनों को छोटे प्लेटफार्मों पर खड़ा नहीं किया जा सकता है। जब तक लंबे प्लेटफार्म खाली नहीं होते, उन्हें आउटर पर रोका जाता है। रेलवे बोर्ड के अपर सदस्य (ट्रैफिक) एके गुप्ता के निरीक्षण के बाद उनके प्रस्ताव पर बोर्ड ने प्लेटफार्मों को बनाने की हरी झंडी दे दी है।
ट्रेनों की लेटलतीफी का बड़ा कारण छोटे प्लेटफॉर्म
डेमो
सेेंट्रल के प्लेटफार्म नंबर पांच से नौ लंबे हैं और इनकी चौड़ाई 24 फुट तक है। इससे ज्यादा बोगियों वाली ट्रेनों के रुकने पर यात्रियों के चढ़ने और उतरने और ट्रेन का इंतजार करने में प्लेटफार्म पर आसानी होती है। सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक, दो, तीन, चार और दस नंबर का विस्तार होगा। इन सभी प्लेटफार्मों की लंबाई दोनों छोर पर 24-24 मीटर (कुल 48 मीटर) तक बढ़ाई जानी है। इन प्लेटफार्मों की चौड़ाई दस से 18 फुट तक है। इन प्लेटफार्मों के विस्तार के बाद 22 से 24 बोगियों वाली ट्रेनें इन प्लेटफार्मों पर आ सकेंगी। अभी तक छोटे प्लेटफार्म होने से 16 से 19 डिब्बों की ट्रेनें रुकती हैं। लंबी ट्रेनों को पनकी, दादा नगर, शुक्लागंज, मरे कंपनी पुल, झकरकटी जैसे आउटरों पर घंटों रुकना पड़ता है।