आस्था का केंद्र मानेश्वर शिवमंदिर
यूपी के हमीरपुर में सूनसान जंगल के बीच बना मानेश्वर शिवमंदिर लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। इसे करीब 200 साल पहले भरुआसमेरपुर कारीमाटी गांव के एक सेठ बनवाया था। बुजुर्ग बताते हैं कि निर्माण के दौरान सेठ को थोड़ा सा गुरूर आ गया तो वह लंबे प्रयास के बाद भी मंदिर की सुराही (मुनार) नहीं बनवा सका। मुनार बनाने के लिए उसके परिजनों ने तीन बार प्रयास किया। लेकिन हर बार विफल रहे। आज भी मंदिर में बरसात का पानी सीधे शिवलिंग पर गिरता है।
भरुआसुमेरपुर सिमनौड़ी-कारीमाटी गांव के बुजुर्ग मुन्नीलाल अवस्थी बताते हैं कि नगर निवासी सेठ छाछे पंसारी की गायों का एक चरवाहा जंगल ले जाता था। लेकिन उसकी गायें चरते हुए जब जंगल स्थित शिव मंदिर वाले स्थान पर पहुंचती थी, तो उसका दूध अपने आप निकलने लगता था। कहते हैं कि जब गाय वापस सेठ के घर पहुंचती तो उनका दूध नहीं निकलता था। इस पर वह चरवाहे से काफी नाराज होता, लेकिन चरवाहा इस घटना से अंजान सिर्फ सेठ की बातें सुनता रहता था। आए दिन होने वाली इस घटना से चरवाहा के साथ सेठ को भी आश्चर्य होने लगा। इस पर सेठ ने चरवाहे के पीछे अपने आदमी लगा दिए। जंगल में जब गायें इस सिद्ध स्थान पर पहुंचीं तो उनका दूध निकलने लगा। इस घटना को देख सेठ के आदमियों ने उसे बताया। जिस पर सेठ ने उस स्थान की खुदाई शुरू करा दी।