सीबीएसई बोर्ड 12वीं की परीक्षाएं रद्द
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सीबीएसई और आईएससी बोर्ड की 12वीं की परीक्षाओं को रद्द करने से मेधावी मायूस हो गए हैं। मेधावियों का कहना है कि दो साल की मेहनत बेकार चली गई। औसत अंकों के आधार पर रिजल्ट जारी होने पर उच्च शिक्षा संस्थानों में दाखिला लेने में परेशानी सामने आएगी क्योंकि संस्थान तो मेरिट के हिसाब से ही प्रवेश देते हैं। वहीं अभिभावक सरकार के इस फैसले को बच्चों की सुरक्षा के दृष्टिकोण से सही बता रहे हैं। शिक्षकों-प्रधानाचार्यों ने फैसले पर मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।
जानिए क्या बोले शिक्षक
सरकार का निर्णय काफी कठोर है। यह छात्रों के लिए अहितकारी होगा। छात्रों को प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए प्रोत्साहित करना मुश्किल भरा रहेगा। पढ़ाई और परीक्षाओं को लेकर छात्रों के मन में अब असमंजस की स्थिति हमेशा रहेगी।
अमित कुमार निरंजन, कॉमर्स विभागाध्यक्ष, जीडी गोयनका स्कूल
सुरक्षा की दृष्टि से सरकार ने बेहतर निर्णय लिया है, लेकिन यह भी सच है कि परीक्षाएं ही छात्रों का सही आकलन करती हैं। मेधावी छात्र निराश हैं। लेकिन उनको भी समझना होगा कि फैसला उन्हीं के हित के लिए किया गया है।
अर्चना निगम, प्रिंसिपल, डीपीएस कल्याणपुर
सरकार को कोई न कोई विकल्प अवश्य निकालना चाहिए था। निश्चित ही यह कठिन समय चल रहा है लेकिन यह छात्रों के भविष्य का सवाल है। बिना परीक्षा दिए अगली कक्षा में प्रमोट करना उनके मनोबल को कमजोर करेगा।
अंजू सेठ, शिक्षिका, एचएएल विद्यालय, चकेरी
परिस्थितियों को देखते हुए सरकार का फैसला एकदम सही है। छात्र निराश हैं। उनकी पूरी तैयारी थी। सभी छात्र परीक्षा देना भी चाहते हैं। लेकिन जब सब सुरक्षित रहेंगे, तभी आने वाली परीक्षाओं के लिए तैयार हो सकेंगे।
रुचि सेठ, प्रिंसिपल, एलेन हाउस स्कूल