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यौन उत्पीड़न के आरोपी जेई को पकड़ने का मामला, सोनभद्र से भी सीबीआई को लगे सुराग तो पहुंची चित्रकूट

Wed, 18 Nov 2020 09:37 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चित्रकूट
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अवर अभियंता रामभवन - फोटो : अमर उजाला
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चित्रकूट जिले में तैनात जेई रामभवन तक पहुंचने के लिए सीबीआई कई माह से प्रयास कर रही थी। सन 2012 में मुख्यालय में एक किशोरी की खुदकुशी के बाद मामला सामने आने पर परिजनों ने आरोप लगाए थे कि जेई ने उसकी अश्लील वीडियो बनाकर ब्लैकमेल किया लेकिन मामला पुलिस में कहीं दर्ज नहीं हो सका।
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स्थानीय लोगों ने बताया कि किशोरी के ही परिजनों ने सीबीआई जांच की मांग की थी। इसके अलावा अब जब जेई के काले कारनामों का सीबीआई ने खुलासा किया है तो कई चौंकने वाले तथ्य भी सामने आ रहे हैं।

दो माह पूर्व सोनभद्र जिले में भी सीबीआई टीम ने इंटरनेशनल स्तर पर वेबसाइट पर पोर्न वीडियो अपलोड कर लाखों रुपये कमाने वालों की जांच की थी। इसी मामले में सीबीआई टीम ने 25 सितंबर को अनपरा सोनभद्र से इंजीनियर नीरज कुमार को पकड़ा था।
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उस पर भी पोर्न वीडियो बनाने व अपलोड करने का आरोप है। जानकारी के अनुसार सीबीआई को यहां मिले कई साक्ष्यों में चित्रकूट के जेई रामभवन का मेल एड्रेस व मोबाइल नंबर और कई मैसेज मिले। इसी आधार पर जांच करते हुए टीम चित्रकूट आ गई। 15 दिन पूर्व ही दिल्ली में सीबीआई ने पोर्न वीडियो का अपलोड होने की रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी।

कहीं मानसिक कुंठा के शिकार तो नहीं था जेई 
जेई रामभवन मूल रूप से नरैनी बांदा निवासी हैं जबकि चालक अभय कुमार कछारपुरवा कालूपुर निवासी है। जेई सन 2010 से चित्रकूट में तैनात है। परिजनों के अनुसार जेई की शादी सन 2007 में हुई थी उसके कोई संतान नहीं है।

2013 में वह अपने भाई के छोटे पुत्र को अपने साथ रखकर पालन पोषण करता है। विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने पहले बताया था कि जेई बेहद गुमसुम व अपने काम से ही मतलब रखते थे। उनकी पत्नी बेहद संवेदनशील व धार्मिक प्रवृत्ति की है। कई साल से उनके संतान न होने पर शायद जेई मानसिक कुंठा का शिकार हो गए थे तभी ऐसी हरकत की होगी हालांकि कोई अभी भी उन पर लगे आरोपों पर विश्वास नहीं कर रहा है।

कई बार नाबलिगों के बने अश्लील वीडियो हुए वायरल
जिले में कई बार नाबालिगों के साथ घिनौना खेल खेलने के बाद शातिरों के वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने की खबरें तो आती रहीं लेकिन इसे वेबसाइट में अपलोड कर लाखों रुपये कमाने के कम ही मामले आए हैं। जिले के कई नामी लोगों के घरों के लोग इस काम में शामिल रहे हैं और पुलिस ने कार्रवाई भी की है।

खोए बच्चों के परिजनों की यादें हुईं ताजा
बच्चों के साथ बड़ी से लेकर छोटी घटनाएं जिले व इससे सटे मप्र के इलाके में होती रहती है। जिसमें बच्चों के साथ यौन शोषण से लेकर फिरौती के लिए अपहरण तक की घटनाएं होती रही हैं। जिसको लेकर समाज सेवियों ने चिंता जताई है।

जिसमें कुछ घटनाओं को लेकर अपराधियों को सजा मिल चुकी है। बच्चों के साथ यौन शोषण मामले में पकडे़ गए जेई की घटना के बाद जिलें में बच्चों के साथ होने वाली घटनाओं को लेकर भी यादें ताजा हो गई हैं।

जिसमें आज तक कुछ बच्चों का पता भी नहीं चला। शहर के कुबरेगंज स्थित एक सोने चांदी का व्यापार करने वाले के बच्चे को बीच बाजार से अपहरण कर लिया गया था। जिसका आज तक पता नहीं चला। इसी तरह से शहर के गणेश बाग स्थन पर लोढ़वारा गांव के एक नाबालिग बच्चे की हत्या कर दी गई थी।

जिसमें माना गया था कि यौन शोषण के बाद ही उसकी हत्या कर दी गई थी। जिसका खुलासा आज तक नहीं हुआ। जिले की सीमा से लगे मप्र के नया गांव थाना अंतर्गत एक तेल व्यापारी के दो मासूम जुड़वा बच्चों का अपहरण कर हत्या कर दी गई।
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इस तरह से कई घटनाएं जिले में बच्चों के साथ होती रहती हैं। ग्रामीण क्षेत्र से आए दिन बच्चे गायब होते रहते हैं। जिनकी रिपोर्ट मात्र गुमशुदी में दर्ज कर ली जाती है। इसके बाद भगवान भरासे छोड़ दिया जाता है।

बच्चे के साथ यौन शोषण करने पर मिल चुकी सजा
धर्मनगरी क्षेत्र के एक आश्रम में रहने वाले एक साधू को बच्चे के साथ यौन शोषण मामले में सतना जिले की न्यायालय ने आजीवन कारावास की सजा भी इसी साल सुनाई है। जुड़वां बच्चों के अपहरण कर हत्या मामले में आरोपी जेल में हैं जल्द ही उनके खिलाफ फैसला होने वाला है। इन आरोपियों ने जेल में ही खुदकुशी कर ली है।

अंधविश्वास के चक्कर में पड़ देते बलि
यौन शोषण के अलावा अंधविश्वास के चक्कर में पड़कर बच्चों की बलि भी दी जाती है। ऐसे भी कई मामले सामने आए है। जिसमें मानिकपुर कस्बे में रेलवे स्टेशन के पास एक घर में बलि देने के नाम पर बच्चे की हत्या कर दी गई थी। जिसमें पति पत्नी गिरफ्तार हुए थे।

बिछडे़ बच्चों को मिलाने का कार्य करती संस्था
बिछड़े बच्चों को उनके परिजनों से मिलाने का कार्य भी शहर की सर्वोदय सेवा आश्रम से संचालित चाइल्ड संस्था करती है। जिसमें ऐसे बच्चे जो परिवार से बिछड़ जाते हैं। उनको मिलाने का कार्य किया है। दो दर्जन से अधिक बच्चों को मिलाने का दावा संस्था के कर्मचारी शिवनरेश व रामस्वरूप ने किया है। वहीं ह्यूमन राइट्स संस्था के सचिव रूद्र प्रसाद मिश्र भी ऐसे परिवारों की सहायता करते हैं जिनके बच्चे खो जाते हैं। जिसमें मुफ्त कानूनी सलाह के अलावा पुलिस से पैरवी करते हैं।
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