कानपुर में आयुध उपष्कर निर्माणी हजरतपुर में करोड़ों के टेंडर घोटाले का खुलासा होने के बाद बृहस्पतिवार को सीबीआई की दो टीमों ने शहर में छापा मारा। टीमों ने मुख्य महाप्रबंधक के आवास और कार्यालय में दस्तावेज खंगाले।
CBI ने दर्ज की FIR, तत्कालीन CGM समेत 10 नामजद
सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा, गाजियाबाद ने इस पूरे घोटाले की परतें खोलने के लिए अलग-अलग प्राथमिकी दर्ज की हैं। इस मामले में तत्कालीन मुख्य महाप्रबंधक अमित सिंह, कनिष्ठ कार्य प्रबंधक दीपेश गुप्ता सहित कई रसूखदार ठेकेदारों और निजी कंपनियों को आरोपी बनाया गया है। दर्ज मुकदमों में कुल 10 लोगों को नामजद किया गया है।
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सीबीआई की अब तक की जांच में जो सनसनीखेज खुलासे हुए हैं, उन्होंने रक्षा मंत्रालय के अफसरों के भी होश उड़ा दिए हैं। जांच में सामने आया है कि साल 2022 से 2025 के बीच ओईएफ हजरतपुर में नियमों को पूरी तरह ताक पर रखकर करीब 12 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी टेंडर बांटे गए।
आरोपी अफसर अमित सिंह का विवादों से पुराना नाता
सीबीआई सूत्रों का कहना है कि आरोपी अमित सिंह पर आय से अधिक संपत्ति का मामला पहले से ही चल रहा है। इस टेंडर घोटाले का प्रारंभिक खुलासा पिछले साल हुआ था, जिसके बाद उनका तबादला हजरतपुर से शाहजहांपुर स्थित आयुध निर्माणी किया गया था। बाद में जनवरी 2026 में उन्हें कानपुर के अरमापुर स्थित ट्रुप कंफर्ट्स लिमिटेड, ट्रेनिंग एकेडमी में भेज दिया गया, जहां वर्तमान में वे तैनात हैं और सीबीआई की रडार पर हैं।
रक्षा मंत्रालय ने लिया संज्ञान, बैठ सकती है अलग से जांच
इस घोटाले ने आयुध उपष्कर निर्माणी की पूरी खरीद प्रक्रिया पर ही गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए रक्षा मंत्रालय ने भी पूरे घटनाक्रम का संज्ञान लिया है। सूत्रों का दावा है कि आने वाले दिनों में रक्षा मंत्रालय इस पूरे नेक्सस को तोड़ने के लिए एक उच्च स्तरीय आंतरिक जांच कमेटी का गठन कर सकता है।