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सूबे के 11 जिलों में कुछ ऐसा है आवारा जानवरों का तांडव, संकट-समाधान से प्रशासन भी परेशान

Wed, 09 Jan 2019 10:52 PM IST
प्रशांत कुमार यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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आवारा जानवर - फोटो : अमर उजाला
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मुख्यमंत्री ने आवारा जानवरों को दस जनवरी तक गोशालाओं में भेजने के निर्देश दिए थे। अब सिर्फ एक दिन बाकी है, पर इसका कुछ खास असर नहीं दिख रहा है। सेंट्रल यूपी और बुंदेलखंड के कई जिलों का जायजा लेने पर कुछ इसी तरह की तस्वीर सामने आ रही है। बुधवार को ‘अमर उजाला’ की टीम ने जायजा लिया तो कहीं एक्सप्रेसवे के एप्रोच रोड पर अन्ना मवेशियों के झुंड चढ़ते दिखे तो कहीं खेतों की ओर रुख करते मिले। कुछ जगह से आक्रोशित किसानों द्वारा आवारा जानवरों को पकड़कर बंद करने की भी खबरें आई हैं। पेश है रिपोर्ट...

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कन्नौज में बुधवार दोपहर करीब एक बजे गांव लोहामढ़, अर्जुनपुर, फगुटा भट्टा, हिमनापुर और तारनपुर के किसानों के खेतों में लगभग 40 आवारा जानवरों का झुंड घुस गया। किसानों ने इन जानवरों को तिर्वा-कन्नौज मार्ग पर आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के फगुआ भट्ठा कट के पास खदेड़ दिया। ये मवेशी टोल प्लाजा से एक्सप्रेसवे पर चढ़ने लगे, लेकिन यूपीडा कर्मियों ने उन्हें तिर्वा की ओर खदेड़ दिया। शाम को दुकानदार और ग्रामीण जानवरों को तिर्वा मवेशी बाजार मैदान में छोड़ आए।

संकट और समाधान से प्रशासन भी परेशान

इटावा जिले में जसवंतनगर के नगला तौर गांव के सरकारी स्कूल से बुधवार सुबह करीब डेढ़ सौ छुट्टा गायों को मुक्त कराया गया है। मंगलवार शाम किसानों ने इन गायों को स्कूल में बंद कर दिया था, उन्होंने फसल को नष्ट होने से बचाने का हवाला दिया है। सीडीओ पीके श्रीवास्तव ने घटना की जानकारी से इंकार किया है। कहा कि यदि ऐसा हुआ है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। जल्द ही गोवंशों को गोशालाओं में पहुंचा दिया जाएगा।

हमीरपुर जिले के राठ में बुधवार को सुबह 10 बजे परेशान किसानों ने सैकड़ों आवारा जानवरों को तहसील परिसर के अंदर खदेड़ दिया। यह देख अधिकारियों के हाथ पांव फूल गए। तहसीलदार रामानुज शुक्ला ने पहुंच नाराज किसानों को समझाबुझा कर शांत कराया और सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने का आश्वासन दिया। तब जाकर किसानों ने तहसील परिसर में खड़े आवारा जानवरों को बाहर निकाला। वहीं एसडीएम सुरेश कुमार ने कहा आवारा जानवरों के आश्रय के लिए नगर पालिका के ईओ को जमीन देखने के लिए कहा गया है, जहां पर आवारा जानवरों को रखा जा सके।

 

संकट और समाधान से प्रशासन भी परेशान

बांदा में सदर तहसील और बड़ोखर ब्लाक के गुरेह गांव में गायों की मौत के बाद जागे प्रशासन की तीसरे दिन भी कवायदें जारी रहीं। बुधवार को एसडीएम सदर थमीम अंसरिया (आईएएस) खुद गांव पहुंची। उन्होंने सुझाव दिया कि एक-एक पशु को ग्रामीण बांध लें। इस प्रस्ताव को ग्रामीणों ने खारिज कर दिया। एसडीएम ने प्रधान और सचिव को निर्देश दिए कि आवारा जानवरों को छोड़ने वालों पर एफआईआर कराएं। कोतवाली प्रभारी को निर्देश दिए कि ग्रामीणों की समस्या सुनकर निदान कराएं।

महोबा जिले में मुख्यमंत्री ने आवारा जानवरों को दस जनवरी तक गोशालाओं में भेजने के निर्देश दिए थे, अब एक दिन बचा है, लेकिन अभी बड़ी संख्या में अन्ना मवेशी घूम रहे हैं। मवईखुर्द, चिचारा, पुरा, बन्नी आदि गांव के प्रधानों ने गोशाला की व्यवस्था करने से इंकार कर दिया है, जिससे इन गांव की गाय झुंड बनाकर खेतों में घुस जाती है, जिससे किसानों की मुश्किलें बढ़ती जा रही है। खन्ना क्षेत्र में करीब 200 बीघा की फसल आवारा जानवरों ने चट कर दी है, जिससे किसानों के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया है।

 

संकट और समाधान से प्रशासन भी परेशान

उरई में आवारा जानवरों की समस्या समेत कई अन्य दिक्कतों के समाधान की मांग को लेकर बुधवार को किसान सड़कों पर उतर आए। भारतीय किसान संघ के तत्वावधान में किसानों ने करमेर रोड से लेकर कलक्ट्रेट तक जुलूस निकाला। उधर, आवारा जानवरों को गोशाला तक पहुंचाने के लिए जिले के अफसर पसीना बहाते नजर आए। उन्होंने ग्रामीणों को भी चेताया कि किसी भी कीमत पर गुरुवार से पशुओं को अन्ना न छोड़ा जाए नहीं तो कार्रवाई को तैयार रहें।


हरदोई में टड़ियावां विकास खंड के गांव बहर स्थित पशु आश्रय स्थल में व्यवस्था दुरुस्त हो गई है। बुधवार को यहां जिला पंचायतराज अधिकारी की मौजूदगी में गो रक्षा संकल्प यज्ञ भी हुआ। डीपीआरओ अनिल कुमार सिंह ने बताया कि यज्ञ के दौरान ब्लाक के सभी ग्राम प्रधानों ने एक-एक ट्राली भूसा और पुवाल देने का संकल्प किया। देर शाम तक लगभग 30 ट्राली भूसा व पुवाल बहर स्थित पशु आश्रय स्थल पहुंच गया। पशु आश्रय स्थल पर पानी और लाइट की व्यवस्था हो गई है।


 
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संकट और समाधान से प्रशासन भी परेशान

फर्रुखाबाद के कायमगंज कोतवाली क्षेत्र के ज्योना गांव में मंदिर में बंद आवारा जानवरों को बाहर निकालने में प्रशासन को 24 घंटे लग गए। इससे जानवरों को रात में भरपेट चारा भी नहीं मिला। मंदिर के पुजारी व आसपास के कुछ लोगों ने घरों के पशुओं से बचा चारा डाल दिया था। प्रशासन ने कुछ जानवर गांव में बांट दिए तो कुछ गोशाला पहुंचा दिए। उधर, शमसाबाद ब्लाक क्षेत्र के बैरमपुर के ग्रामीणों ने पंचायत घर में आवारा जानवरों को लाकर बंद कर दिया। पुलिस को जब इसकी जानकारी हुई तो मौके पर पहुंचकर आवारा जानवरों को छुड़ाया।

उन्नाव में मुख्य सचिव ने बुधवार को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये निराश्रित जानवरों की समस्या पर अब तक किए गए कार्य की प्रगति समीक्षा की। डीएम देवेंद्र कुमार पांडेय ने सभी निकाय क्षेत्रों में पालतू पशुओं को टैग लगाने का काम 15 जनवरी तक पूरा होने का दावा किया। बताया कि निराश्रित जानवरों के लिए मनरेगा से सभी ब्लाकों में एक एक आश्रय स्थल बनेगा। इसके लिए भूमि का चिन्हांकन व कार्ययोजना तैयार है। वहीं, आवारा जानवरों को हटाने के लिए प्रशासन ने नगर में किसी प्रकार का गोवंशीय पशु संरक्षण केंद्र भी नहीं खोल सका है।

औरैया में प्रशासन 35 अस्थायी गोशालाओं का लक्ष्य लेकर चल रहा है लेकिन इनमें दस पर बमुश्किल काम शुरू हो सका है। शेष पर जमीन की नापजोख आदि तक ही सीमित है। ज्वाइंट मजिस्ट्रेट अनुपम शुक्ला ने कहा कि दयालपुर की कान्हा गौशाला में 80 पशुओं को रखने की व्यवस्था है। फिलहाल इसमें 56 पशु शिफ्ट किए जा चुके हैं। दिबियापुर की गोशाला में 80 आवारा जानवरों को शिफ्ट किया जाएगा। फफूंद में 250, दिबियापुर में 368 आवारा जानवर चिह्नित किए गए हैं। पशुपालन विभाग विभाग द्वारा जिलेभर में आवारा जानवरों का चिह्नीकरण शुरू किया है।

    
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