जालौन जिले के कालपी में करीब 12 साल पहले जावित्री के अपहरण और हत्या के मामले के छीटे तत्कालीन बसपा सरकार के दामन तक भी पहुंच गए थे। जिन्हें धोने के लिए ही आनन-फानन में मायावती सरकार ने मामले की जांच सीबीसीआईडी को सौंप दी थी।
वर्ष 2008 में कालपी थाना क्षेत्र में हुए किशोरी जावित्री उर्फ गायत्री के चर्चित अपहरण और फिर उसकी हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जावित्री अभी जिंदा है और वह पुलिस के सामने आ गई है।
इस मामले में जावित्री की मां ने नगर के नामचीन 10 लोंगो के खिलाफ़ अपहरण की रिपोर्ट कालपी थाने में दर्ज कराई थी। एक वर्ष बाद घाटमपुर थाना क्षेत्र में सड़क दुर्घटना में घायल एक किशोरी की शिनाख्त जावित्री की मां राजो ने अपनी बेटी जावित्री के रूप में की थी, तो मामला हत्या में भी तरनीम कर दिया गया था।
मामले को लेकर तत्कालीन बसपा सरकार में जोरदार हंगामा हुआ था। आरोपियों के पक्ष में पैरवी कर रहे तत्कालीन बसपा विधायक छोटे सिंह चौहान को भी निशाने पर ले लिया गया था व उनपर गंभीर आरोप लगाए गए थे।
तत्कालीन डीएम ऋग्जयाम सैम्फिल के दखल के बाद शासन ने मामले की सीबीसीआईडी जांच के आदेश दे दिए थे। सीबीसीआईडी भी जावित्री को नहीं खोज पाई और न ही घाटमपुर में मरी लड़की का पता लगा पाई।
इसपर आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट लगा दी गई। कुछ आरोपी जेल भी भेजे गए। जेल में एक आरोपी की मौत भी हुई। कुछ आरोपी जमानत पर बाहर हैं। 15 सितंबर को बसपा नेता जगजीवन अहिरवार ने कालपी थाने में एक प्रार्थना पत्र देकर कहा कि जावित्री की उनसे बात हुई है वह अलीगढ़ में है और वह सही सलामत है। इसके बाद जावित्री को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। सीओ आरपी सिंह का कहना है कि मामले में जांच की जा रही है जल्द ही पूरे मामले का खुलासा कर दिया जाएगा।