मथुरा के मंदिर में नमाज पढ़कर सुर्खियों में आऐ फैजल का पैतृक आवास नगर के मोहल्ला जटवारा में है। बुधवार को वहां मिले पिता ने बेटे का बचाव करते हुए कहा कि वह एक संस्था में सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने को मुहिम चला रहा है।
उसने 26 से 29 अक्तूबर तक 84 कोसी परिक्रमा करने के बाद महंत की इजाजत से मंदिर में नमाज पढ़कर एकता का संदेश दिया। उस पर कार्रवाई राजनीतिक षड्यंत्र है। फैजल खान मोहल्ला जटवारा निवासी अजमल खां उर्फ पापा मियां का पुत्र है।
बुधवार को घर पर मिले पिता ने कहा कि बेटा खुदाई खिदमतगार संस्था के लिए काम करता है। इस संस्था का मुख्य उद्देश्य राष्ट्रपिता महात्मा गांधी व खान अब्दुल गफ्फार खान के बताए रास्ते पर चलना है।
इससे जुड़े लोग देश में हिंदू-मुस्लिम एकता का संदेश देते हैं। फैजल ने मंदिर में नमाज किसी को धोखा देकर नहीं पढ़ी थी।कई दिन तक वहां रह कर रसखान की मजार पर चादर चढ़ाकर मंदिर में दर्शन करने के बाद परिसर में नमाज पढ़ी थी। इसकी जानकारी मंदिर के महंत को भी थी।
फैजल इस संस्था के जरिए वर्षों से एकता का संदेश दे रहा है। इस मुहिम में देश के तमाम साधु संत व महंत भी जुड़े हैं। फैजल दो भाई दो बहनें हैं। एक भाई महाराष्ट्र में है। दोनों बहनों की काफी पहले शादी हो चुकी है।