शोरगुल सुनकर मोहल्ले के ही प्रमोद, कौशल, राजेंद्र आदि ने गुड्डू को पकड़ लिया और पुलिस के हवाले कर दिया। इस मामले में वादी पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे जिला शासकीय अधिवक्ता हृदेश कुमार पांडेय ने बताया कि इस मामले के दो आरोपी सईम और फईम का मामला दूसरी फास्ट ट्रैक कोर्ट में चला।
गुड्डू उर्फ हलीम का मामला स्पेशल जज एससी/एसटी अत्याचार निवारण एक्ट शिवकुमार की अदालत में चल रहा था। सजा सुनाने के बाद दोषी को पुलिस सुरक्षा में जेल भेज दिया गया।
काम न आया नाबालिग होने का बहाना
सहायक शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि दोषी गुड्डू उर्फ हलीम ने सजा से बचने के लिए अपने आप को नाबालिग घोषित करने की कोशिश की। इस पर उसका मामला किशोर न्याय बोर्ड ललितपुर स्थानांतरित कर दिया।
हालांकि किशोर न्याय बोर्ड ने 27 जुलाई 2022 को निर्णय में पाया कि गुड्डू उर्फ हलीम घटना के समय नाबालिग नहीं था। इस पर गुड्डू की पत्रावली एससी/एसटी कोर्ट में भेज दी गई। बुधवार को उसेएससी/एसटी कोर्ट से आजीवन कारावास की सजा सुना दी गई।