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फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने का मामला: दोषी लिपिक के सभी प्रमोशन खत्म, नक्सलियों को हुए थे असलहे सप्लाई

Sun, 27 Dec 2020 03:08 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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फर्जी शस्त्र लाइसेंस - फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश के कानपुर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस के जरिए नक्सलियों को असलहा सप्लाई होने के मामले में कलेक्ट्रेट के तत्कालीन असलहा लिपिक और वर्तमान में इंगलिश रिकार्ड कीपर पर डीएम ने बड़ी कार्रवाई की है। डीएम ने उनको मूल वेतन पर करके उनके सभी प्रमोशन खत्म करके डिमोशन कर दिया है। एसीएम द्वितीय की जांच में लिपिक दोषी पाए गए थे। 

2016 एटीएस ने शहर के चार नामी गन हाउस मालिकों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप था कि गन हाउस मालिकों ने नक्सलियों को असलहे बेचे थे। असलहा सप्लाई करने के लिए कानपुर कलेक्ट्रेट से फर्जी ट्रांजिट लाइसेंस जारी किया गया था। एटीएस ने तत्कालीन असलहा लिपिक महेश सिंह चौहान को आरोपी बनाया था। वह खुद कोर्ट के समक्ष सरेंडर होकर जेल गए थे।

शासन के आदेश पर डीएम ने महेश पर लगे आरोपों की जांच कराई। एसीएम द्वितीय अमित कुमार राठौर ने जांच करके रिपोर्ट डीएम को दी है। उसमे तत्कालीन असलहा लिपिक और वर्तमान में इंगलिश रिकार्ड कीपर महेश सिंह चौहान को दोषी ठहराकर कार्रवाई की संस्तुति की है। डीएम आलोक तिवारी ने बताया कि जांच रिपोर्ट में ईआरके को दोषी माना गया है। शासन के आदेश पर गलत ट्रांजिट लाइसेंस बनने में कार्रवाई की गई है। उनको मूल वेतन पर कर दिया गया है। उसके सभी प्रमोशन रद कर कर दिए गए हैं।

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