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मुजफ्फरनगर फैक्टरी का खौफनाक सच: भागने वालों को मारकर बोरे में फेंकते थे... घर लौटे शिवम की आपबीती

Mon, 29 Jun 2026 11:29 PM IST
Shikha Pandey न्यूज डेस्क, अमर उजाला, औरैया

सार

Auraiya News: मजदूरों पर पिटबुल कुत्ते छोड़े जाते थे। मुजफ्फरनगर में बंधक बनाए गए युवक के घर पहुंचने पर परिजनों ने खुशी जाहिर की।
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घर लौटा बंधकमुक्त शिवम - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुजफ्फरनगर की एक दोना-पत्तल फैक्टरी में बंधक बनाए गए 13 मजदूरों में शामिल दिबियापुर के खजुबैया गांव का शिवम शनिवार रात घर लौट सका। उसे सही सलामत देख मां-बाप के आंसू रुकने का नाम नहीं ले रहे। छह महीने तक बंधक रहे शिवम ने बताया कि बंधक मजदूरों को सिर्फ डेढ़ घंटे सोने दिया जाता था। खाने में उन्हें चोकर की रोटी मिलती थी।
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शिवम ने बताया कि एक जनवरी को गुरुग्राम से घर लौटते समय रेलवे स्टेशन पर उसका सामान चोरी हो गया था। बिना टिकट दिल्ली पहुंचने पर उसे मुजफ्फरनगर का अंकित मिला, जिसने काम का झांसा देकर उसे फैक्टरी में बंद कर दिया। शिवम के अनुसार, वहां मजदूरों को महज एक से डेढ़ घंटे ही सोने दिया जाता था। मशीनों की बेल्ट, पेंचकस और तारों से बेरहमी से पीटा जाता था।

खाने के नाम पर पूरे दिन में सिर्फ चोकर की चार रोटियां, नमक और लाल मिर्च मिलती थी। निगरानी के लिए खूंखार पिटबुल कुत्ते छोड़े गए थे। शिवम ने रोते हुए बताया कि भागने की कोशिश करने वाले दो मजदूरों को पीट-पीटकर मार डाला गया और उनके शव बोरे में भरकर फेंक दिए गए थे।
 

इधर, बेटे की तलाश में भटकती मां राजरानी और पिता वीरेंद्र गौतम ने गुरुग्राम की सड़कों पर पोस्टर लेकर चक्कर काटे, तब कहीं जाकर पुलिस सक्रिय हुई।
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 मां ने बताया कि 65 किलो के शिवम का वजन अब आधा ही रह गया है। बेटे के सकुशल लौटने पर परिवार में खुशी तो है लेकिन दोषियों के खिलाफ आक्रोश की मांग चरम पर है।
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