पुलिस पर हमला कर अपराधी को भगाने का मामला
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पुलिस हिरासत से हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह को भगाने के मामले में आरोपियों नारायण सिंह भदौरिया, गोपाल शरण सिंह चौहान व रॉकी यादव की जमानत सोमवार को निचली अदालत ने खारिज कर दी। इसके बाद आननफानन में सेशन कोर्ट मेें अर्जी लगाई गई, जिस पर मंगलवार को सुनवाई होगी। उधर, सुनवाई को लेकर कचहरी में दिनभर आपाधापी का माहौल रहा।
नारेबाजी और हंगामा होता रहा। कोरोना काल के चलते कचहरी में सामान्य कामकाज बंद हैं। इसलिए डेढ़ माह से कचहरी में सन्नाटा है, लेकिन नौबस्ता के एक गेस्ट हाउस के बाहर हुई इस घटना में दो वकीलों की गिरफ्तारी के बाद कचहरी का माहौल गरमा गया है। वर्चुअल माध्यम से अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने आरोपी वकील नारायण सिंह भदौरिया, गोपाल शरण सिंह चौहान व एक अन्य रॉकी यादव की ओर से जमानत पर बहस की।
कहा कि उन्हें गलत फंसाया गया है। कार्यक्रम स्थल के बाहर कुछ लोग झगड़ा कर रहे थे, जिनका बीच-बचाव कराया गया। हिस्ट्रीशीटर से उनका कोई लेनादेना नहीं है। वहीं अभियोजन ने उन पर हिस्ट्रीशीटर को भगाने और पुलिस पर हमले का आरोप लगाया। बताया कि नारायण सिंह के खिलाफ पांच और गोपाल शरण के खिलाफ छह आपराधिक मामले दर्ज हैं।
दोनों पक्षों को सुनने के बाद प्रभारी एसीएमएम तृतीय शैलेंद्र यादव ने तीनों आरोपियों की जमानत अर्जी खारिज कर दी। वहीं एक अन्य आरोपी रणधीर तोमर उर्फ नीशू का आपराधिक इतिहास मंगाने का आदेश दिया। जमानत खारिज होने की सूचना मिलते ही वकीलों में आक्रोश फैल गया। कचहरी में घूम-घूमकर पुलिस-प्रशासन मुर्दाबाद के नारे लगाए।
यह था मामला
नौबस्ता स्थित आकर्षण गेस्ट हाउस में दो जून की दोपहर भाजपा के पूर्व दक्षिण जिला मंत्री नारायण सिंह भदौरिया की जन्मदिन पार्टी थी। इसमें पार्टी नेताओं के साथ कई अधिवक्ता भी मौजूद थे। पार्टी में बर्रा थाने का हिस्ट्रीशीटर मनोज सिंह भी पहुंचा था, जिसकी खबर पुलिस को लग गई। नौबस्ता पुलिस ने दबिश देकर मनोज को गिरफ्तार कर लिया और जीप में बैठाकर थाने ले जाने लगी।