श्याम प्रताप से उमर गौतम बनने के बाद पत्नी राजेश्वरी को रजिया बेगम बनना पड़ा। राजेश्वरी के माता-पिता व भाई कोई भी नहीं चाहता था कि उसकी घर की बेटी को मुस्लिम बनना पड़े। मुस्लिम धर्म न अपनाना पड़े उसके लिए राजेश्वरी अपने मायके खेसहन में रही।
लेकिन करीब चार साल बाद राजेश्वरी डॉ. उमर की जिद के आगे बौनी पड़ गयी। अंत में उसको दिल्ली जाना पड़ा। श्याम के उमर गौतम बनने पर एक बार खेसहन गांव में पंचायत भी हुई। जिसमें श्याम के परिवार के लोग व राजेश्वरी के घर के लोग शामिल रहे।
पंचायत में सभी ने श्याम के फैसले को गलत बताया। यहां तक कि ससुराल के लोगों ने अपना व्यवसाय व नकदी रुपये देने की बात कही, लेकिन उमर ने दोबारा धर्म परिवर्तन करने से मना कर दिया। धर्मांतरण गिरोह का मास्टरमाइंड मौलाना उमर गौतम फतेहपुर जिले के थरियांव थाना क्षेत्र के पंथुवा गांव रहने वाला है।