बालिका गृह में रहने के दौरान उसे सबका स्नेह मिला। न्यायालय का फैसला सुनने के लिए प्रियंका पटेल, जबर सिंह व वीरेंद्र सिंह यादव की विशेष अभिरक्षा में राजकीय बालिका गृह से पीड़िता कोर्ट लाई गई थी। पीड़िता की ट्रेन से बरामदगी के समय भी प्रियंका और जबर उसके साथ थे।
मानव तस्कर गिरोह के चंगुल में फंसी पीड़िता को आखिर भारतीय न्यायालय से न्याय मिला। उसकी बांग्लादेश वापसी के संबंध में भी कोर्ट ने व्यवस्था दी है। - विवेक शुक्ला, एडीजीसी
कानपुर के न्यायिक इतिहास का पहला मुकदमा है। आठ गवाह पेश किए गए। बाहरी जिले में स्थानांतरित हो चुके गवाहों को भी समय पर बुलाकर गवाही कराई और बहस कर सिर्फ 42 दिन में न्यायिक कार्यवाही पूरी करा दी। -जितेंद्र कुमार पांडे, एडीजीसी
पीड़िता और गवाहों के बयानों में कई विरोधाभास रहे हैं। न्यायालय के फैसले का सम्मान करते हैं। अभियुक्तों के पास अपील करने का अधिकार सुरक्षित है। सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की जाएगी। - महेंद्र कुमार दुबे, बचाव पक्ष के अधिवक्ता