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Kanpur News: कैप्सूल पेसमेकर सामान्य रखता दिल की धड़कन

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कानपुर। कैप्सूल बराबर पेस मेकर सीधा दिल में फिट हो जाएगा। यह .5 वोल्ट करंट दिल की मांसपेशियों में पहुंचाता रहेगा। इससे दिल की धड़कन भी सामान्य रहेगी और मांसपेशियां दिल की पंपिंग भी पूरी क्षमता से करेंगी। कानपुर कार्डियोलॉजी समिट 2025 में इस नए उपकरण के संबंध में रविवार को वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. विवेका कुमार ने जानकारी दी। यह भी बताया कि यह कैप्सूल पेस मेकर 15 साल काम करता रहता है।
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अभी जो पेस मेकर चीरा लगाकर लगाया जाता है, उसमें गर्दन के पास कॉलर बोन के नीचे बैटरी लगती है। पेसमेकर से एक तार बैटरी में जोड़ा जाता है। इसमें संक्रमण होने और दूसरी जटिलताएं होती हैं। एक अरसे के बाद बैटरी को बदलना पड़ता है लेकिन इस कैप्सूल पेसमेकर में ये समस्याएं नहीं रहतीं। इसमें अधिक जटिलताओं का भी अंदेशा नहीं रहता है। दिल्ली से आए वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ. कुमार ने बताया कि कैप्सूल पेसमेकर पैर की फीमोरल नस से सीधे दिल में पहुंचा दिया जाता है।
उन्होंने बताया कि इसमें बैटरी रहती है जो 15 साल तक काम करती है। इसके अलग से कहीं से तार वगैरह नहीं लगाना पड़ता। 15-20 साल के बाद इसे बदला भी जा सकता है। इसे निकालकर दूसरा कैप्सूल पेसमेकर लगा दिया जाता है। डॉ. कुमार ने बताया कि अभी तक वह 2000 रोगियों को यह पेसमेकर लगा चुके हैं। अभी इसकी कीमत अधिक है लेकिन जब इसका इस्तेमाल बढ़ेगा तो आम आदमी की पहुंच में कीमत आ जाएगी। सामान्य पेसमेकर की तुलना में इसमें 60 फीसदी जटिलताएं कम होती हैं। कैप्सूल पेसमेकर को दिल के बाएं वेंट्रिकल में लगाया जाता है। दिल का विद्युत प्रवाह प्रभावित होने और हार्ट ब्लॉक होने पर रोगी पेस मेकर की जरूरत पड़ती है।
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समिट में बिना चीरा दिल का वाॅल्व बदले जाने पर भी चर्चा हुई। डॉ. विवेका कुमार ने बताया कि नस के जरिये दिल तक पहुंचकर वाॅल्व बदल दिया जाता है। इसमें रोगी 24 घंटे में अस्पताल से डिस्चार्ज हो जाता है। चीरा लगने पर रोगी को आठ-10 दिन अस्पताल में रुकना पड़ता है।
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