कालपी रोड स्थित फील्ड गन फैक्ट्री में तैयार की गई शारंग तोप के बैरल की पहली खेप जबलपुर कैरिज (जीसीएफ) के लिए रवाना की गई। वहां से यह सेना को भेजी जाएगी। पहली खेप में शारंग तोप की दो बैरल भेजी गई हैं। इसके पहले 31 जुलाई को ओएफसी में बनी शारंग तोप रवाना की गई थी।
निर्माणी के वरिष्ठ महाप्रबंधक अनिल कुमार ने बताया कि 2022 तक सेना को 300 तोप दी जानी हैं। इसमें से 150 तोप निर्माणी में बननी हैं। शारंग पूरी तरह से स्वदेशी है। इटारसी प्रूफ रेंज में वृहद दबाव पर इसका परीक्षण किया गया था। मार्च 2018 में हुए कई परीक्षणों में इस तोप ने भारत फोर्ज और पुंज ल्यावड की तोपों को पछाड़ कर ओपेन बिड में सेना से आर्डर हासिल किया था।
तोप निर्माण के लिए रक्षा मंत्रालय और आयुध निर्माणी बोर्ड के बीच 25 अक्तूबर को समझौता हुआ था। इस तोप की मारक क्षमता 38 किलोमीटर है। तोप टारगेट को बेहद सटीकता के साथ ध्वस्त करती है। इसके अलावा तोप की निरंतरता (गोले दागने की क्षमता) जबरदस्त है।
इस तोप में पहाड़ों में छिपे दुश्मनों को तबाह करने की विशेष क्षमता है। इस तोप को 70 डिग्री तक घुमाया जा सकता है। 2022 तक तीन चरणों में सेना को तोप दी जाएंगी। पहले चरण में 30 दूसरे चरण में 70 और अगले चरण में 100-100 तोप का निर्माण किया जाना है।
तोप की खासियत
वजन - 8 टन
लंबाई - 11 मीटर
चौड़ाई - 2.45 मीटर
ऊंचाई 2.55 मीटर
कैलिबर - 155 मिलीमीटर
कैरिज स्प्लिट ट्रेल
मारक क्षमता - 38 किलोमीटर तक