उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की पीसीएस-जे 2018 परीक्षा पास कर सिविल जज के पद पर चयनित होने वालों में बड़ी संख्या कानपुर के युवाओं की है। यहां के करीब एक दर्जन से अधिक छात्र-छात्राओं ने इसमें सफलता हासिल की है। सफल होने वाले युवाओं में किसी ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पढ़ने के बाद जज बनने की ठानी तो किसी ने लोगों को न्याय दिलाने के इरादे से।
पहली ही बार में सोनाली बनीं जज
श्याम नगर की सोनाली मिश्रा ने पहली ही बार में पीसीएस-जे में 40वीं रैंक पाकर सफलता हासिल की है। पिता राजेंद्र मिश्रा रूमा स्थित एक एक्सपोर्ट कंपनी में स्टोर इंचार्ज और मां ममता गृहिणी हैं। सोनाली ने इंटर ऑक्सफोर्ड मॉडल सीनियर सेकेंडरी स्कूल और बीए-एलएलबी की पढ़ाई एमिटी यूनिवर्सिटी, लखनऊ से की। सोनाली ने बताया कि इंटर में साइंस विषय था। सभी चाहते थे कि इंजीनियरिंग करूं, लेकिन मेरा रुझान हमेशा कानून की पढ़ाई के तरफ रहा। मैं हमेशा हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के सभी फैसलों को पढ़ती और उस पर प्रतिक्रियाएं भी देती थी। इसीलिए एलएलबी की पढ़ाई शुरू की।
आकांक्षा ने जज बनने का ठान लिया था
बीएनडी कॉलेज से एलएलबी करने वाली आकांक्षा जायसवाल के पिता दिलीप कुमार जायसवाल रजिस्ट्री कार्यालय में दस्तावेज लेखक और मां रमा गृहिणी हैं। आकांक्षा ने पीसीएस-जे में 473वीं रैंक हासिल की है। आकांक्षा ने बताया कि बड़ी बहन बैंक मैनेजर और दूसरी इंश्योरेंस कंपनी में अधिकारी हैं। एक बहन इंफोसिस में इंजीनियर है और छोटा भाई बीटेक कर रहा है। उन्होंने बताया कि बीएससी करने के बाद एक रिश्तेदार ने एलएलबी करने की सलाह दी। बीएनडी कॉलेज में दाखिला लिया। एलएलबी पढ़ने के साथ रुचि बढ़ती गई और सोच लिया कि जज ही बनना है। शिक्षकों का इस सफलता में पूरा योगदान रहा।
पिता की इच्छा पर बनें जज
स्वर्गीय पिता की इच्छा पूरी करने के लिए रोहित शाही ने पीसीएस-जे की पढ़ाई की। रोहित ने 290वीं रैंक प्राप्त की है। वह बताते हैं कि पिता राकेश शाही जिला न्यायालय में क्लर्क के पद पर कार्यरत थे। वर्ष 2016 में उनका निधन हुआ। पिता की इच्छा थी कि मैं जज बनूं। इसी सपने को सच करने के लिए दिन-रात मेहनत की। बीएनडी कॉलेज से एलएलबी की डिग्री ली है। एलएलबी के साथ ही तैयारी की और पहली बार में ही सफलता पा ली। रोहित ने वर्ष 2013 में बीएससी की पढ़ाई की है।
हंसपुरम के आकाश भी बने जज
हंसपुरम के आकाश गुप्ता भी अब कोर्ट में बैठकर लोगों को न्याय देंगे। आकाश ने पीसीएस जे में 589 रैंक हासिल की है। पिता अनिल गुप्ता व्यापारी और मां शशि गुप्ता गृहिणी हैं। आकाश ने बताया कि एक बड़े भाई शिक्षक हैं और दूसरे डॉक्टर। भविष्य को देखते हुए वह भी इंजीनियर बनना ही चाहते थे। इसलिए उन्होंने इंटरमीडिएट के बाद बीसीए की पढ़ाई की। लेकिन उनकी दिलचस्पी कंप्यूटर में नहीं थी। बीसीए के बाद उनके पिता के एक दोस्त ने एलएलबी करने की सलाह दी। एलएलबी की पढ़ाई शुरू की तो रुचि बढ़ती चली गई और सोच लिया कि जज बनना है।
घाटमपुर के अविरल ने हासिल की सफलता
घाटमपुर, भीतरगांव के रहने वाले अविरल उमराव पीसीएस जे में सफलता हासिल कर जज बन गए हैं। अविरल की 306वीं रैंक है। पिता विनोद उमराव आयकर विभाग में निरीक्षक पद पर तैनात हैं। अविरल ने केडीएमए से इंटरमीडिएट पास करने के बाद डॉ. राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी से बीए-एलएलबी की पढ़ाई की। फिर एलएलएम की परीक्षा उत्तीर्ण की। अविरल ने बताया कि वह 12वीं के बाद से ही जज बनकर देशसेवा करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने एलएलबी की पढ़ाई की।
पिता वकील, बेटा जज
यशोदा नगर के रजत सिंह यादव ने यूपीपीएससी की पीसीएस-जे में 85वीं रैंक हासिल की है। रजत की ओबीसी रैंक पांचवीं है। पिता राम सेवक यादव जिला न्यायालय में अधिवक्ता हैं। द लायर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष भी रहे हैं। मां राज यादव गृहिणी हैं। रजत ने वीरेंद्र स्वरूप एजूकेशन सेंटर किदवई नगर से 12वीं तक की पढ़ाई की है। इसके बाद क्लैट की परीक्षा में ऑल इंडिया 72वीं रैंक के जरिए राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी, लखनऊ में एडमिशन ले लिया। वहबताते हैं कि वह पिता को देखकर काफी कुछ सीखते थे। बचपन में ही तय कर लिया था कि जज बनेंगे। 2016 में पांच वर्षीय लॉ की पढ़ाई पूरी करने के बाद एक साल उन्होंने इसके लिए तैयारी की और पहली बार में ही सफलता हासिल कर ली।